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79.46 करोड़ घोटाले में फंसे IAS आरके सिंह की आज कोर्ट में पेशी…बेटे के दुबई खाते में ₹2.5 करोड़CBI ने पूछे सवाल

चंडीगढ़। पंचकूला नगर निगम के 79.46 करोड़ रुपए के फंड घोटाले में गिरफ्तार वरिष्ठ IAS अधिकारी राम कुमार सिंह और पंचायत विभाग के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट प्रिंस शर्मा को रविवार को CBI की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। दोनों की तीन दिन की रिमांड अवधि पूरी हो रही है। CBI ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

रिमांड के दौरान CBI ने कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ की। एजेंसी का दावा है कि जांच में सामने आए कुछ वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों के संबंध में आरके सिंह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। सूत्रों के अनुसार, दुबई में बेटे के खाते में भेजे गए 2.5 करोड़ रुपए, करनाल में खरीदी गई 15 एकड़ कृषि भूमि और कुछ कथित बेनामी संपत्तियों को लेकर जांच एजेंसी लगातार पूछताछ कर रही है।

कोर्ट में रिमांड के लिए CBI ने रखे थे ये तर्क

CBI ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश और संचार रिकॉर्ड गायब पाए गए हैं। एजेंसी ने आशंका जताई थी कि वरिष्ठ अधिकारी होने के कारण आरके सिंह गवाहों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को प्रभावित कर सकते हैं।

CBI के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि उस समय नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका के कमिश्नर रहे आरके सिंह ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर सेक्टर-32 स्थित IDFC First Bank में नया बैंक खाता खुलवाने और उसमें 100 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी राशि ट्रांसफर करने की मंजूरी दी थी। एजेंसी का दावा है कि यह कार्रवाई वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के विपरीत थी।

जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि डिजिटल साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि कथित साजिश में भूमिका निभाने के बदले आरके सिंह को अवैध लाभ मिला हो सकता है। इसके अलावा उनके हस्ताक्षर वाले तीन चेक अब तक बरामद नहीं हुए हैं, जिनके जरिए फंड के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

प्रिंस शर्मा पर भी साजिश में शामिल होने का आरोप

CBI का आरोप है कि पंचायत विभाग के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट प्रिंस शर्मा ने बैंक अधिकारियों और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी खातों से जुड़े दस्तावेजों में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करवाया था। एजेंसी का कहना है कि संबंधित विभाग में तैनात नहीं होने के बावजूद वह खातों से जुड़े सत्यापन कॉल में शामिल रहे और कथित साजिश को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

CBI के निशाने पर 3 बड़े मुद्दे

  1. बेटे के दुबई खाते में ₹2.5 करोड़ ट्रांसफर

जांच के दौरान CBI को जानकारी मिली कि करीब 2.5 करोड़ रुपए दुबई में बेटे के बैंक खाते में भेजे गए थे। एजेंसी इस रकम के स्रोत और ट्रांसफर के कारणों की जांच कर रही है।

  1. करनाल में 15 एकड़ कृषि भूमि की खरीद

CBI की जांच में करनाल में खरीदी गई करीब 15 एकड़ कृषि भूमि का मामला भी सामने आया है। एजेंसी जमीन खरीद में इस्तेमाल धन के स्रोत की पड़ताल कर रही है।

  1. कथित बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज

गिरफ्तारी से पहले चंडीगढ़ और करनाल स्थित ठिकानों पर हुई छापेमारी में CBI को कई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले थे। एजेंसी अब इन संपत्तियों के वास्तविक मालिक और निवेश के स्रोत की जांच कर रही है।

आबकारी इंस्पेक्टर से IAS बनने तक का सफर

राम कुमार सिंह ने 23 मई 1995 को हरियाणा आबकारी एवं कराधान विभाग में टैक्सेशन इंस्पेक्टर के रूप में सरकारी सेवा शुरू की थी। वर्ष 1999 में वे हरियाणा सिविल सेवा (HCS) में चयनित हुए और बाद में 8 मई 2019 को उन्हें IAS कैडर में शामिल कर 2012 बैच आवंटित किया गया।

पत्नी के नाम पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट और माइक्रो ब्रेवरी

संपत्ति विवरण (IPR) में आरके सिंह ने उल्लेख किया था कि उनकी पत्नी स्वतंत्र रूप से कारोबार करती हैं। उनके नाम पेट्रोल पंप, माइक्रो ब्रेवरी, रेस्टोरेंट, रेंटल प्रोजेक्ट, कृषि भूमि और प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े निवेश हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि उनकी पत्नी और दोनों बेटे आयकरदाता हैं तथा उनकी अलग-अलग संपत्तियां और वित्तीय स्रोत हैं।

फिलहाल पूरे मामले में CBI की जांच जारी है और एजेंसी अदालत से आगे की रिमांड की मांग भी कर सकती है।

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