चंडीगढ़। हरियाणा में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज की सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के अस्पतालों में करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से 19 अतिरिक्त नवजात वेंटिलेटर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे जन्म के बाद सांस लेने में परेशानी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे शिशुओं को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (SNCU) में फिलहाल 54 नवजात वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। नए 19 वेंटिलेटर मिलने के बाद इनकी कुल संख्या बढ़कर 73 हो जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए प्रदेशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
SNCU को मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों के रूप में विकसित करने की पहल
स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों को एकीकृत मातृ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयों के रूप में विकसित करने की प्रदेशव्यापी पहल भी शुरू की जा रही है।
इसका उद्देश्य यह है कि अस्पताल में भर्ती नवजात शिशुओं को इलाज के दौरान अपनी मां से अनावश्यक रूप से अलग न रहना पड़े। शिशु को विशेष चिकित्सा सुविधा देने के साथ मां की मौजूदगी और देखभाल को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
स्तनपान और परिवार की भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, नई व्यवस्था में नवजात शिशुओं के उपचार के साथ माताओं की निरंतर मौजूदगी सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। इसके तहत स्तनपान में सहयोग दिया जाएगा और शिशु की देखभाल में परिवार की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
इससे नवजात शिशुओं को बेहतर देखभाल देने के साथ मां और बच्चे के बीच संपर्क बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अंबाला और कुरुक्षेत्र से मिले अनुभव के आधार पर विस्तार
प्रदेशव्यापी पहल की शुरुआत अंबाला सिटी और कुरुक्षेत्र के जिला अस्पतालों में स्थापित मातृ-नवजात शिशु देखभाल सुविधाओं से मिले शोध और व्यावहारिक अनुभव के आधार पर की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य नवजात शिशुओं के इलाज की क्षमता बढ़ाने के साथ प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना है।
