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हरियाणा कांग्रेस प्रभारी से हुड्‌डा गुट के MLA नाराज:नए लेटर का विरोध, बत्रा बोले- भाषा पर आपत्ति; बिना परमिशन कार्यक्रमों पर रोक

हरियाणा कांग्रेस के छोटे से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक को अब किसी भी धरना-प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस या राजनीतिक कार्यक्रम से पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की मंजूरी लेनी होगी। इस संबंध में हरियाणा कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद की ओर से आदेश जारी किया गया है। एक जून को जारी पत्र में विधायक से लेकर सांसद तक सभी जनप्रतिनिधियों को इस नियम का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, पत्र जारी होते ही इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। कांग्रेस के दो वरिष्ठ विधायक अशोक अरोड़ा और बीबी बत्रा ने इस आदेश को जारी किए जाने की वजह पर सवाल उठाए हैं। बत्रा ने तो पत्र की भाषा पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है।

उधर, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र का कहना है कि उन्हें विधायकों के विरोध की कोई जानकारी नहीं है और न ही इस संबंध में उन्हें कोई लिखित सूचना मिली है। उन्होंने कहा, “मैं बताना चाहता हूं कि मुझे प्रदेश के सभी जिलों से फोन आए हैं और लोगों ने इस फैसले की काफी सराहना की है। यह निर्णय पार्टी के हित में है। यदि कोई इसका विरोध कर रहा है तो वह पार्टी हित में नहीं सोच रहा। पार्टी का कोई भी आदेश कभी विरोध के लिए नहीं होता, बल्कि संगठन को मजबूत करने के लिए होता है।”

लेटर जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?

1. बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा बृजेंद्र सिंह ने हाल ही में सद्भाव यात्रा निकाली थी। पार्टी में इसे उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा गया। माना जा रहा है कि ऐसे कार्यक्रमों पर नजर रखने के लिए यह निर्देश जारी किया गया है।

2. अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस के कई नेता प्रदेश नेतृत्व से अलग अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहे हैं। कई बार उनके बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन से भी अलग रहे। नया आदेश ऐसी स्थिति को रोकने की कोशिश माना जा रहा है।

3. व्यक्तिगत राजनीति पर रोक हाईकमान को शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ नेता पार्टी के नाम पर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में लगे हैं। इससे संगठन कमजोर पड़ रहा था। नया नियम इसी पर रोक लगाने के लिए लाया गया है।

4. संगठन को एकजुट रखने की कोशिश हरियाणा कांग्रेस में इस समय संगठन में बदलाव और नई नियुक्तियां हो रही हैं। ऐसे में पार्टी चाहती है कि सभी कार्यक्रम एक ही दिशा में और नेतृत्व की जानकारी में हों।

5. गुटबाजी पर नियंत्रण विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं के समर्थकों के बीच गुटबाजी की चर्चा रही है। माना जा रहा है कि यह आदेश संगठन में अनुशासन बनाए रखने और गुटबाजी कम करने के लिए जारी किया गया है।

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