केंद्र सरकार के तीन खेती कानूनों के खिलाफ 11 महीने से चल रहे किसानों के आंदोलन के चलते दिल्ली सीमा पर बंद पड़े सिंघु और टिकरी बॉर्डर को खुलवाने के लिए मंगलवार को अहम मीटिंग हुई। बहादुरगढ़ हुई इस बैठक में हरियाणा सरकार की ओर से गठित हाई-पावर कमेटी के अध्यक्ष और प्रदेश के होम सेक्रेटरी (ASC) राजीव अरोड़ा, DGP पीके अग्रवाल, ADGP संदीप, कमिश्नर पंकज यादव के अलावा झज्जर के DC श्यामलाल पूनिया, झज्जर के SP वसीम अकरम और सोनीपत के SP राहुल शर्मा शामिल हुए। इसमें किसान यूनियनों के प्रतिनिधि और उद्योगपति भी पहुंचे। तकरीबन 4 घंटे चली बैठक में सरकारी अधिकारियों ने किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों के सामने अपनी बात रखी।

किसानों ने भी अधिकारियों को अपनी मांग और समस्या, दोनों से अवगत कराया। बहादुरगढ़ के उद्योगपतियों भी अपना पक्ष किसानों और अधिकारियों के सामने रखा। उद्योगपतियों के अनुसार, सिंघु और टिकरी बॉर्डर बंद होने से सबसे बड़ा नुकसान उद्योगपतियों का हो रहा है क्योंकि आंदोलन की वजह से उनकी फैक्ट्रियों में काम बंद पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के आंदोलन की वजह से बंद पड़े रास्तों को खुलवाने के लिए प्रदेश स्तरीय हाई-पावर कमेटी गठित की है। इस कमेटी में हरियाणा के होम सेक्रेटरी राजीव अरोड़ा, डीजीपी पीके अग्रवाल, सीआईडी चीफ आलोक मित्तल और एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) के अलावा सोनीपत व झज्जर के डीसी-एसपी शामिल हैं। यह हाई-पावर कमेटी सोनीपत में भी एक बैठक कर चुकी है मगर उसमें किसान संगठनों का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा था। बहादुरगढ़ में हुई बैठक में किसान संगठन का प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ।दो दौर में 4 घंटे चली इस बैठक में बॉर्डर पर बंद रास्ते खोलने के लिए मंथन किया गया।

बैठक में सबसे पहले सरकारी अधिकारियों ने एक-एक कर अपनी बात रखी। उसके बाद किसानों का पक्ष सुना गया। अंत में उद्योगपतियों की बारी आई। उद्योगपतियों का कहना था कि किसानों के आंदोलन की वजह से हजारों लोगों का रोजगार छीन चुका है। कुछ फैक्ट्री बंद हो चुकी है तो कुछ बंद होने के कगार पर है। हाईवे खोलने के लिए सरकार और किसान मिलकर बीच का रास्ता निकाले, जिससे उनका कारोबार भी चलता रहे।

हाईपावर कमेटी में शामिल अधिकारियों ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल और उद्योगपतियों के साथ टिकरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन स्थल का दौरा किया। टीम ने टिकरी बॉर्डर पर कई जगह रास्ता खोलने के विकल्प देखे। बताया जा रहा है कि बैठक सकारत्मक रही और अगले कुछ दिनों में रास्ते खोलने पर कोई सहमति बन सकती है।

मीटिंग में पहुंचे किसान संगठनों के पदाधिकारियों का कहना था कि सरकार उन्हें कानूनी रूप से अपनी चाल में फंसाने की कोशिश कर रही है मगर किसान षड्यंत्र को समझते हैं। रास्ते हरियाणा और दिल्ली सरकार ने बंद किए हैं और वहीं खोलेंगी। अब चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है इसलिए सरकार किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाना चाहती है मगर किसान साफ कर चुके हैं कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी तक वह दिल्ली बॉर्डर से नहीं हटेंगे।

किसान आंदोलन को 11 माह हो चुके हैं। इस आंदोलन के कारण हुए नुकसान के चलते उद्योगपति सरकार से लेकर मानव अधिकार आयोग तक गुहार लगा चुके हैं। अकेले बहादुरगढ़ में 7 हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां है जिनमें 3 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। आंदोलन के चलते कई कंपनियों पर ताला लटक चुका है। इस बैठक में बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से सुभाष जग्गा, विकास सोनी, नरेन्द्र छिक्कारा, पवन जैन व हरिशंकर बोहती शामिल है।

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