पंचकूला में शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमे प्रदेश के 138 मॉडल संस्कृति स्कूलों के प्रिंसिपल उपस्थित रहेऔर बतौर मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने टीचर्स को संबोधित किया और बोले कि लीडरशिप बहुत बड़ा परिवर्तन कर सकती है। कार्यक्रम में 16 पंचायतें आई हैं। इसलिए मास्टरों से कह रहा हूं कि पंचायतों से संपर्क किया करो।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि आपको नहीं पता नहीं कि आप क्या हैं। गांव में आपका बहुत बड़ा सम्मान है। हमारे गांव के मास्टर जी का इतना रूतबा था कि गांव में यदि कोई फैसला नहीं होता तो लोग मास्टर जी के पास जाते थे। मास्टर जी फैसला देते थे तो मान लेते थे। ऐसी इज्जत मास्टर जी ने बना रखी थी। इसलिए स्कूल में पंचायतों को बुलाया करो। कभी कभी चाय पी लो तो थोड़ा-थोड़ा उनसे जुड़ाव भी बना रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मास्टर राष्ट्र निर्माण का काम करते हैं। मास्टर नौकरी करने वाला आदमी नहीं है। आप बहुत बड़ा काम कर रहे हैं, जिम्मेदारी को महसूस करें। जब मैं शिक्षा मंत्री बना तो लोगों ने कहा कि फंस गया। रोज मास्टरों की यूनियन तेरे खिलाफ कुछ न कुछ करती रहेगी। यह तुझे होश नहीं आने देंगे। इतनी बड़ी समस्या है। परंतु मुझे लग रहा है कि सबसे अच्छा काम मुझे ही मिल गया। मेरे और आपके पास छंटे हुए लोग हैं, जो अभावग्रस्त हैं। कहीं से छांट कर नहीं लाने। यदि हम अच्छा काम नहीं कर पाए तो हम पाप के भागीदार हैं। मास्टरों के बच्चे आईएएस, आईपीएस बनते हैं तो इससे पता चलता है कि उन्होंने पुण्य कमाया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुझे पता चला कि हमारे स्कूलों में अबकी बार किताबें नहीं पहुंची। इसका कारण पता चला कि हाई पावर परचेज कमेटी की मीटिंग लेट हुई। हमारी वजह से कुछ लेट नहीं होना चाहिए, जो कमियां हैं उसे दूर करेंगे। प्राइवेट स्कूल वाले अपनी मार्केटिंग कर रहे हैं। हम अपने मॉडल संस्कृति स्कूलों की मार्केटिंग अच्छी तरह से नहीं कर रहे। मेरा निवदेन है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों की मार्केटिंग अच्छी तरह करो। यह प्रचार होना चाहिए कि किस स्कूल से बच्चे हमारे पास आ रहे हैं। हमारे टीचरों के बारे में यह धारणा है कि वे पढ़ाते ही नहीं है। परंतु मैं यह मानता हूं कि 10,12 प्रतिशत ऐसे होंगे, परंतु सारे नहीं है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारा हरियाणा पहला राज्य है जहां फीस की बढ़ोतरी और स्कूल की वर्दी के ऊपर भी नियम बनाए हैं । उन्होंने कहा कि वर्दी व किताबों को लेकर नियम के अनुसार 5 साल तक बदल नहीं सकते । उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों को एक लेटर भी जारी किया गया है कि कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को मजबूर नहीं कर सकता कि एक खास दुकान से ही किताबें लेनी होंगी। उन्होंने कहा कि पुस्तकों को लेकर भी उनके द्वारा विचार किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ स्कूल अपना निजी मुनाफा कमाने के लिए एक ही स्थान से किताब लेने की बात कर रहे हैं तो निश्चित रूप पर उन पर रोक लगाई जाएगी।

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