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हरियाणा की IAS अधिकारी रानी नागर पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी…5 साल से ड्यूटी से गायब, सरकार ने भेजा अंतिम नोटिस, जवाब न मिलने पर जाएगी नौकरी

चंडीगढ़ से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला सामने आया है, जहां हरियाणा कैडर की 2014 बैच की IAS अधिकारी रानी नागर के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। लंबे समय से बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के चलते उनकी सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, रानी नागर पिछले करीब साढ़े पांच वर्षों से अपनी ड्यूटी पर नहीं लौटी हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ है। इसे सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।

पहले से चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई
राज्य सरकार ने उनके खिलाफ 5 मई 2022 को अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद मामले की जांच और विभागीय प्रक्रिया लगातार जारी रही।

पिछले साल जुलाई में सरकार ने उन्हें जबरन सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया था, लेकिन संघ लोक सेवा आयोग ने इस पर हस्तक्षेप करते हुए रोक लगा दी थी। आयोग ने सुझाव दिया था कि अधिकारी का ग्रेड दो साल के लिए घटाया जाए और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

बार-बार नोटिस के बावजूद नहीं दिया जवाब
सरकार की ओर से रानी नागर को कई बार ई-मेल के जरिए नोटिस भेजे गए, लेकिन अब तक उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। इसके बाद कार्मिक विभाग ने उन्हें अंतिम नोटिस जारी किया है।

नोटिस में साफ कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर जवाब नहीं दिया गया, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्हें कुछ कहना नहीं है।

सेवा समाप्ति की सिफारिश संभव
सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में जवाब न मिलने पर नियमों के तहत अगली कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए किसी अतिरिक्त नोटिस की आवश्यकता नहीं होगी। माना जा रहा है कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय को उनकी सेवा समाप्त करने की सिफारिश भेज सकती है।

2020 से ड्यूटी पर नहीं लौटीं
रानी नागर को आखिरी बार 11 मार्च 2020 को अभिलेखागार विभाग में अतिरिक्त सचिव और निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने 27 अक्टूबर 2020 तक कार्य किया, जिसके बाद से वह बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, IAS अधिकारियों के लिए सेवा नियमों का पालन अनिवार्य होता है और लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहना गंभीर अनुशासनहीनता माना जाता है।

सरकार की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त कदम मानी जा रही है।

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