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हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: 3 SMO और 1 मेडिकल ऑफिसर सस्पेंड, गिरते लिंगानुपात पर लिया एक्शन

हरियाणा सरकार ने राज्य में गिरते लिंगानुपात और पीसी-पीएनडीटी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।

स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने तीन वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (SMO) और एक चिकित्सा अधिकारी (MO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। निलंबित अधिकारियों में डॉ. टीना आनंद, डॉ. विजय परमार, डॉ. सतपाल और डॉ. प्रभा शामिल हैं।

विभाग की ओर से कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों पर पीसी-पीएनडीटी कानून की सही मॉनिटरिंग नहीं करने और गिरते लिंगानुपात को लेकर गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन अधिकारियों ने लिंग अनुपात सुधार के लिए चलाए जा रहे अभियानों की प्रभावी निगरानी नहीं की। इन अधिकारियों ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए बनाए गए तंत्र को सख्ती से लागू नहीं किया। इसके अलावा, संबंधित जिलों में पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत आवश्यक कार्रवाई और फॉलोअप में गंभीर लापरवाही बरती। अधिकारियों और फील्ड टीमों के बीच समन्वय सुनिश्चित नहीं किया।

हरियाणा सरकार लंबे समय से बेटी बचाओ अभियान और लिंग अनुपात सुधार को प्राथमिकता देती रही है। राज्य सरकार का मानना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन नहीं करेंगे, तो कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाना संभव नहीं होगा। इस कार्रवाई के जरिए सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लिंग अनुपात सुधार में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी।

हरियाणा कभी देश के सबसे खराब लिंग अनुपात वाले राज्यों में शामिल रहा है। पिछले वर्षों में सरकार के लगातार प्रयासों से इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब सरकार इस उपलब्धि को बनाए रखने और और बेहतर करने के लिए निगरानी तंत्र को और सख्त कर रही है। निलंबन अवधि के दौरान इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले को राज्य में पीसी-पीएनडीटी कानून के सख्त अनुपालन और लिंग अनुपात सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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