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हरियाणा गेस्ट टीचर्स मामला हाईकोर्ट पहुंचा: रेगुलर करने के आदेश पर चुनौती, हजारों प्रमोशन पर असर

हरियाणा में गेस्ट टीचर्स को रेगुलर कर सेवा और रिटायरमेंट के सभी लाभ देने संबंधी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश के खिलाफ कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। 25 मई को आए इस फैसले को अब चुनौती दी गई है। मामले में दावा किया गया है कि अदालत के समक्ष कुछ पुराने महत्वपूर्ण फैसले प्रस्तुत नहीं किए गए थे। इस अपील के चलते अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और इसका असर राज्य में हजारों शिक्षकों के प्रमोशन व सेवा संबंधी मामलों पर पड़ सकता है।

इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह याचिका दलीप सिंह और अन्य की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2006 से अब तक गेस्ट टीचर्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दे चुके हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान उनका उल्लेख नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरकार और गेस्ट टीचर्स की ओर से अदालत के समक्ष सभी तथ्य नहीं रखे गए। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि गेस्ट टीचर्स को नियमितीकरण के साथ वरिष्ठता का लाभ मिलता है, तो शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों JBT, TGT और PGT शिक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई अब 9 सितंबर को निर्धारित की गई है।

हरियाणा में गेस्ट टीचर्स को नियमित (रेगुलर) करने से जुड़े आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और संबंधित गेस्ट टीचर्स को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष वर्ष 2006 से अब तक गेस्ट टीचर्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले प्रस्तुत नहीं किए गए। उनका कहना है कि यदि इन फैसलों को अदालत के सामने रखा जाता, तो निर्णय अलग हो सकता था।
याचिका में यह भी कहा गया है कि गेस्ट टीचर्स को नियमित करने के आदेश का असर शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों नियमित शिक्षकों के प्रमोशन और वरिष्ठता (सीनियरिटी) पर पड़ सकता है। इससे भविष्य में पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले में अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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