हरियाणा सरकार ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। हाल ही में सामने आए डॉग बाइट के मामलों के बाद शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 582 सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) की मरम्मत कराने का निर्णय लिया है।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय (पंचकूला) ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से महज तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट और खर्च का अनुमान तलब किया है। विभाग की कोशिश है कि इन गर्मी की छुट्टियों का पूरा सदुपयोग करते हुए स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर और सुरक्षित बनाया जा सके।
बता दें कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की सूची की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि इन 582 स्कूलों की बाउंड्री वॉल को मरम्मत की सख्त जरूरत है। हालांकि, शुरुआत में मिली सूची में निर्माण लागत का कोई जिक्र नहीं किया गया था। इसी को देखते हुए अब संबंधित स्कूलों से पूरी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। स्कूलों की जियो टैगिंग और अन्य जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद हरियाणा लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत कार्य में आने वाले खर्च का सटीक एस्टीमेट तैयार किया जाएगा।
मरम्मत के खर्च और फंडिंग को लेकर भी शिक्षा निदेशालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। निर्देशों के अनुसार, यदि किसी स्कूल की चारदीवारी की मरम्मत का खर्च एक लाख रुपये से कम आता है, तो इसके लिए कंसोलिडेटेड चाइल्ड वेलफेयर फंड का इस्तेमाल किया जा सकेगा. हालांकि, इसके लिए खाते में पर्याप्त राशि मौजूद होना अनिवार्य है, वहीं, जिन स्कूलों के पास इस फंड में पैसा उपलब्ध नहीं है। उन्हें मरम्मत का अनुमान और जरूरी दस्तावेज आगे की कार्रवाई के लिए सीधे निदेशालय को भेजने होंगे।
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित प्रारूप में सभी दस्तावेज और रिपोर्ट तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराएं। विभाग का लक्ष्य है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान ही मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि नए सत्र में बच्चों को सुरक्षित और बेहतर स्कूल वातावरण मिल सके।
