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हरियाणा सरकार सख्त: स्कूलों की सुरक्षा पर 48 घंटे में मांगी रिपोर्ट

हरियाणा सरकार ने स्कूल सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को ‘फाइनल रिमाइंडर’ भेजा है। रिमांइडर में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अप्रैल-जून 2026 की स्कूल सेफ्टी क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट (QPR) और लंबित एक्शन टेकन रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर हर हाल में विभाग को भेजी जाए।

विभाग ने चेतावनी दी है कि यह मामला ‘मोस्ट अर्जेंट एंड टाइम बाउंड’ श्रेणी का है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 30 जून 2026 को जारी पत्र में कहा कि कई जिलों ने अभी तक निर्धारित प्रारूप में स्कूल सुरक्षा रिपोर्ट नहीं भेजी है, जबकि यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्कूल सुरक्षा नीति के तहत अनिवार्य है।

शिक्षा निदेशालय ने अपने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि कई जिलों की पिछली चार तिमाहियों की Quarterly Progress Reports (QPRs) अभी भी लंबित हैं। इसके कारण स्कूलों में सुरक्षा संबंधी गतिविधियों की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं हो पा रहा है और ज्वाइंट मॉनिटरिंग कमेटी (JMC) की समीक्षा प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

विभाग ने अधिकारियों से कहा कि लंबित रिपोर्टों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल तैयार कर निर्धारित प्रारूप में भेजा जाए।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि ‘अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ’ (सिविल रिट याचिका संख्या-483/2004) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में सुरक्षा मानकों को लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद NDMA School Safety Policy-2016 लागू की गई। जिसके तहत प्रत्येक जिले से स्कूल सुरक्षा गतिविधियों की नियमित तिमाही रिपोर्ट मांगी जाती है।

निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला प्रशासन के साथ मिलकर सभी सरकारी एवं सहायता प्राप्त स्कूलों में निर्धारित स्कूल सुरक्षा गतिविधियां सुनिश्चित करें। इसके बाद निर्धारित प्रोफार्मा में प्रत्येक तिमाही की रिपोर्ट समय पर विभाग को भेजी जाए।

साथ ही भविष्य में रिपोर्ट भेजने में देरी न हो, इसके लिए प्रत्येक जिले में स्थायी मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

स्कूल सुरक्षा रिपोर्ट केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि इससे यह तय होता है कि प्रदेश के स्कूल किसी भी आपदा, दुर्घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। रिपोर्ट के आधार पर राज्य और केंद्र स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा होती है और कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।

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