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हरियाणा में स्कॉलरशिप वेरिफिकेशन का टाइम फिक्स:शिक्षण संस्थानों को दिए 3 से 7 दिन; देरी पर रजिस्ट्रार-प्राचार्य जिम्मेदार होंगे, केस खर्च झेलेंगे

हरियाणा हायर एजूकेशन डायरेक्टरेट (DHE) ने कॉलेजों व अन्य शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र स्टूडेंट्स के लंबित पड़े छात्रवृत्ति आवेदनों को 3 से 10 दिन के अंदर निपटाएं। इसमें 2022 से 2025 तक के छात्रवृति आवेदन शामिल हैं।निर्देश में कहा गया है कि शीघ्र सत्यापन से एल3 स्तर पर भुगतान करना समय पर संभव होगा, जिससे छात्रवृत्ति बिना किसी देरी के पात्र छात्रों तक पहुंच सकेगी।

जानकारी अनुसार, DHE ने प्रदेश भर के प्राइवेट और राज्य विश्वविद्यालयों के साथ-साथ सभी सरकारी, सहायता प्राप्त, स्व-वित्तपोषित और निजी डिग्री, कानून और शिक्षा कॉलेजों को शैक्षणिक वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (PMS) योजना के तहत लंबित छात्रवृत्ति आवेदनों के सत्यापन और मंजूरी में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

संस्थानों को इसके लिए 2022-23 के लिए तीन दिनों के भीतर, 2023-24 के लिए सात दिनों के भीतर और 2024-25 के लिए 10 दिनों के भीतर छात्रों का सत्यापित विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही लापरवाही पर चेताया भी गया है।

लेटर में चेतावनी दी गई है, इस मामले में किसी भी चूक के लिए विश्वविद्यालयों के सभी रजिस्ट्रार और सरकारी सहायता प्राप्त, स्व-वित्तपोषित, शिक्षा और विधि महाविद्यालयों के प्राचार्य जिम्मेदार होंगे। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि देरी के कारण विभाग को मुकदमे का सामना करना पड़ता है, तो संबंधित संस्थान को जवाबदेह ठहराया जाएगा और मुकदमे का खर्च उनके अपने कोष से वहन किया जाएगा।

महानिदेशक (हायर एजूकेशन) की ओर से संयुक्त निदेशक (स्कॉलरशिप) द्वारा जारी यह पत्र, सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (सेवा) को भी भेज दिया गया है।

प्रक्रिया की व्याख्या करते हुए, एक कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए, पात्र छात्रों को अपना विवरण पोर्टल पर ऑनलाइन जमा करके आवेदन करना होगा। इसके बाद संबंधित कॉलेज और विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति राशि जारी करने में आसानी के लिए जानकारी का सत्यापन करते हैं, इसलिए संस्थानों को लंबित आवेदनों के सत्यापन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रधानाचार्य ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य लंबे समय से लंबित छात्रवृत्ति के बकाये को पूरा करना तथा राज्य भर के योग्य अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना है।

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