हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने सरकार की कर्मचारी एवं विभाग विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्य स्तरीय मीटिंग रोडवेज भवन रोहतक में 12 अक्टूबर को बुलाई हैं।जिसमें आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा के राज्य प्रधान ओमप्रकाश ग्रेवाल राज्य महासचिव जयबीर घणघस व डिपो प्रधान सुरेश नहरा ने बताया कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार लगातार कर्मचारी व विभाग विरोधी नीतियां लागू कर रही है। जिससे कर्मचारियों में रोष है।
केंद्र व राज्य सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों की पेंशन यह कहकर बंद कर दी थी कि पेंशन से सरकार के खजाने पर आर्थिक बोझ पड़ता है ओर NPS स्किम लागू कर दी जिसके तहत कर्मचारियों को अब नाम मात्र की पेंशन मिल रही हैं।जबकि सांसद ,पूर्व सांसद,व पूर्व विधायक, विधायक पुरानी नीति के तहत पेंशन ले रहे हैं।जबकि कई सांसदों व विधायकों पर भ्रष्टाचार के संगीन मामले भी हैं और वे जेलों में भी बंद हैं। फिर भी सरकार उनको पेंशन दे रही है। क्या इनको पेंशन देने से आर्थिक बोझ नही पड़ रहा। केंद्र व राज्य सरकार का सरकारी कर्मचारी सरकार की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पूरी ईमानदारी से कार्य करता है और अपनी जान की परवाह न करते हुए भी कोरोना काल जैसी महामारी में भी आम जनता की सेवा करके सरकार की नीतियों को आप जनता तक पहुंचाता हैं।
केंद्र व राज्य सरकार श्रम कानूनो में बदलाव करके पूंजीपतियो के हित में बना रही है।जिसके तहत यूनियन बनाने का अधिकार भी छीना जा रहा है और न्याय व हक के लिए हड़ताल जैसे आंदोलन को खत्म करने जा रही है। जिसे कर्मचारी किसी भी सूरत में सहन नहीं करेगा। राज्य सरकार ने हाल ही में पत्र जारी करके रोडवेज विभाग में चालक परिचालक व कर्मशाला के कर्मचारियों के दे अवकाशो को नियमों को ताक पर रखकर उन्हें कम किया जा रहा हैं।
राज्य सरकार परिचालक के पे स्केल की वेतन विसंगति का कोई हल नहीं कर रही है। इससे संबंधित यूनियन द्वारा समय-समय पर लिखित तर्क भी दिए जा चुके हैं। राज्य सरकार द्वारा बनाए गए रोजगार कौशल विभाग को बंद किया जाए।इसके तहत लगे कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है इन्हे अनेक लाभों से भी वंचित किया जा रहा है। नियमित होने के हक को भी छीना जा रहा है। सभी तरह के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए। विभागों में खाली पड़े हजारों पदों पर पक्की भर्ती की जाए। विभागों का निजीकरण बंद किया जाए ताकि प्रदेश की जनता को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं लगातार मिलती रहे और बेरोजगारों को रोजगार मिले।

