सीटू हरियाणा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक रोहतक के सुखपुरा चौक स्थित राज्य मुख्यालय प्रभात भवन में हुई। सीटू ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये घोषित न करने तथा औद्योगिक मजदूरों, मनरेगा व निर्माण मजदूरों सहित अन्य मजदूरों के मुद्दों के प्रति भाजपा सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ 10 जुलाई को पूरे राज्य में जिला मुख्यालयों पर पड़ाव डालकर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा बनाई।
बैठक की अध्यक्षता सीटू की राज्य अध्यक्ष सुरेखा ने की। बैठक में सीटू के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि हरियाणा में पिछले 10 वर्षों से न्यूनतम वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। कानूनी तौर पर मजदूरों के वेतन में हर 5 वर्ष में संशोधन होना चाहिए।उन्होंने कहा कि मजदूरों के हितों के लिए गठित विभिन्न बोर्डों में केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को लेने की बजाय सरकार ने अपने अनुयायियों को भर्ती कर लिया है, जिनका मजदूरों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के हितों के लिए गठित विभिन्न बोर्डों में केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को लेने की बजाय सरकार ने अपने अनुयायियों को भर्ती कर लिया है, जिनका मजदूरों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।इसके अलावा सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रदेश में महंगाई और बेरोजगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया है और पिछले 10 वर्षों से समाज के विभिन्न वर्ग इस कुशासन के कारण आंदोलन करने को मजबूर हैं।
सीटू के राज्य महासचिव जय भगवान ने कहा कि हरियाणा के विकास में मजदूरों का मौलिक योगदान है, लेकिन न तो सरकार उनकी सुन रही है और न ही अफसरशाही। प्रदेश के उद्योग मजदूरों के लिए भट्टी बन गए हैं। 2024 में ही भाजपा ने बड़े कॉरपोरेट के हित में कानूनों में बदलाव कर मजदूरों को गुलाम बना दिया है। निर्माण कारीगर मजदूरों के हित में गठित बोर्ड को पंगु बना दिया गया है और सुविधाओं पर अघोषित ताला लगा दिया गया है।
मीटिंग में सरकार के मजदूर विरोधी रवैए की निंदा करते हुए पूरे प्रदेश में आगामी 10 जुलाई को जिला मुख्यालय पर पड़ाव डालने का आह्वान किया। वहीं जुलाई महीने में अलग-अलग यूनियनों के होने वाले आंदोलन को भरपूर समर्थन देने का ऐलान किया गया। साथ ही अगस्त महीने में होने वाले मजदूर किसानों के संयुक्त अभियान की रूपरेखा को राज्य कार्यकारिणी ने अपनी मंजूरी दी।

