दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर पैसों के लेनदेन और रंजिश ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। गुरुग्राम के सेक्टर-70 स्थित नाले से मिले शव की शिनाख्त दिल्ली निवासी और अडानी रियल्टी में बतौर मैनेजर कार्यरत युवराज सिंह मनचंदा (30) के रूप में हुई है। जिस युवराज के सिर पर इस साल सेहरा सजने वाला था, उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री का पर्दाफाश करते हुए युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया है।
घटना 6 सितंबर की है, जब युवराज अपनी बहन के साथ दिल्ली के लाजपत नगर मार्केट में अपनी शादी की खरीदारी करने निकले थे। दोपहर में लाजपत नगर के एक रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद युवराज ने बहन से कहा कि वह गुरुग्राम में एक जरूरी मीटिंग निपटाकर रात 10 बजे तक घर लौट आएंगे।
लेकिन जब रात तक उनका मोबाइल स्विच ऑफ आया और कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। 11 सितंबर को बहन हरसिमरन ने लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जब युवराज के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले, तो आखिरी बातचीत उनकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स के साथ पाई गई।
पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। शुरुआती जांच के मुताबिक, युवराज और आन्या पहले ‘एमार’ कंपनी में साथ काम करते थे। साल 2022 में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में कंपनी ने आन्या को निकाल दिया था, जबकि युवराज ने दूसरी कंपनी जॉइन कर ली थी। दोनों के बीच पैसों का कुछ पुराना लेनदेन पेंडिंग था।
6 सितंबर को आन्या ने ही फोन करके युवराज को गुरुग्राम बुलाया था। वहां बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ा कि आन्या और उसके लिव-इन पार्टनर संयम ने युवराज की गर्दन में दो गोलियां मार दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी खौफ में आ गए। उन्होंने युवराज के शव को अपनी क्रेटा कार में छिपाया और करीब 7 घंटे तक गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में घूम-घूमकर शव को ठिकाने लगाने की जगह तलाशते रहे। आखिरकार कोई पुख्ता जगह न मिलने पर उन्होंने शव को सेक्टर-70 के नाले में फेंक दिया और उत्तराखंड भाग गए।
