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गुलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) से पुणे में मचा हड़कंप, इस बीमारी की चपेट में आए करीब 59 मरीज

देश में एचएमपीवी वायरस (HMPV) के बाद अब गुलियन-बैरे सिंड्रोम ने लोगों को खौफ में डाल दिया है। दरअसल, पुणे के 3 अस्पतालों में गुलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं। पुणे में इस सिंड्रोम के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शहर से गुलियन-बैरे सिंड्रोम के 59 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। संदिग्ध मामलों के सामने आने के बाद, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी से निपटने के लिए एक टीम गठित की है। आपको बता दें कि पुणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के नमूने जांच के लिए आईसीएमआर-एनआईवी को भेजे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो इसके अधिकतर मामले पुणे के सिंहगढ़ रोड इलाके से सामने आए हैं।

गुलियन बैरे सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिकाओं (nerves) पर हमला करती है। यह एक दुर्लभ बीमारी है, जिसके कम ही मामले देखने को मिलते हैं। यह श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी के लक्षण, वायरस के संपर्क में आने के कुछ समय बाद नजर आ सकते हैं। इस बीमारी की वजह से कमजोरी और सुन्नता हो सकती है। गुलियन बैरे सिंड्रोम पैरालायसिस का कारण भी बन सकता है।

आपको बता दें कि आमतौर पर जीबीएस के लक्षण अचानक से दिखाई देते हैं। जीबीएस के मामले समय के साथ तेजी से बढ़ते जाते हैं।

आपको बता दें कि गुलियन बैरे सिंड्रोम का अभी कोई सटीक कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि, यह जीका वायरस के कारण हो सकता है। यह वायरस आमतौर पर श्वसन और पाचन-तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, शरीर की तंत्रिकाओं में हमला करना शुरू करती है, तो इस स्थिति में व्यक्ति को गुलियन बैरे सिंड्रोम के लक्षणों का अनुभव हो सकता है। इसकी वजह से तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचती है। गुलियन बैरे सिंड्रोम के मुख्य कारण इस प्रकार हैं-

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