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हरियाणा सरकार द्वारा किसानों के केस वापस ना लेने के चलते 24 तारीख़ को किसानों द्वारा GT Road जाम किया जाएगा

अंबाला में रेल चक्का जाम को लेकर किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बड़ा ऐलान किया है। चढ़ूनी ने कहा है कि किसानों की चेतावनी के बाद रेलवे ने दर्ज सभी केस वापस ले लिए हैं, इसलिए अब 24 नवंबर को रेल का चक्का जाम नहीं होगा। अब इसी दिन मोहड़ा अनाज मंडी के पास जीटी रोड को जाम किया जाएगा। चढ़ूनी ने कहा कि सूबे के गृह मंत्री अनिल विज का किसानों के साथ मीटिंग को लेकर दिया गया बयान गुमराह करने वाला है।

किसान नेता चढ़ूनी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने अभी तक अपने वादे अनुसार सभी केस वापस नहीं किए हैं। कई केस ऐसे हैं जिनको वापस लेने की प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई है, जैसे एफआईआर नंबर 206 व 77। जबकि आंदोलन के समझौते के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री ने किसानों के शिष्टमंडल से ये केस वापस लेने का वायदा किया था। करीब 32 से अधिक मुकदमे आंदोलन के पहले के ऐसे हैं जो आंदोलन के समझौते के दौरान वादा करने के बावजूद भी वापस नहीं हुए हैं।

किसान नेता ने बताया कि हरियाणा में दर्ज बहुत से मुकदमे अभी अदालतों में पेंडिंग हैं, हालांकि हरियाणा सरकार ने ज्यादातर केसों में रद करने की सिफारिश कर दी है। उसके बावजूद भी बहुत संख्या में केस अदालतों में विचाराधीन हैं। जिस कारण से बहुत से लोगों के शस्त्र लाइसेंस रद कर दिए गए हैं और पासपोर्ट भी नहीं बनाए जा रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की ओर से दावा किया गया है कि सरकार अपने वादे पर खरी नहीं उतरी है। अभी तीनों कृषि आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमों में 35 केस अभी भी रद नहीं किए गए हैं। मजबूरी में फिर से भाकियू को किसानों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन का रुख अख्तियार करना पड़ रहा है।

किसानों नेताओं के दावों के विपरीत हरियाणा सरकार का कहना है कि आंदोलन के दर्ज हुए मुकदमे वापस ले लिए गए हैं। अब तक 294 केस रद किए जा चुके हैं। कुछ प्रक्रिया में हैं। सरकार की ओर से दावा किया गया है कि 164 केस ऐसे हैं जिनकी सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। कोर्ट की ओर से 98 मामलों को रद करने के लिए मंजूरी दे दी है।

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक फिर से किसान आंदोलन शुरू करने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस तो ले लिए, लेकिन अभी किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया है। हरियाणा में राज्य और केंद्र सरकार जातिवाद फैलाने का काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसान आंदोलन दोबारा शुरू करते हैं तो वह उनका साथ देंगे।

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