चरखी दादरी में परिवार द्वारा सताए जाने से आहत होकर बुजुर्ग पति-पत्नी ने जहरीला पदार्थ खाकर सुसाइड कर लिया। इनका पोता IAS अधिकारी है। पुलिस ने वारदात के बाद परिवार के चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक जगदीशचंद और भागली देवी अपने बेटे के पास बाढड़ा के शिव कॉलोनी में रहते थे। इसके बाद ईआरवी 151 मौके पर पहुंची और बाढड़ा थाने से भी पुलिस टीम को मौके पर बुलाया गया। हालत बिगड़ने पर बुजुर्ग दंपती को पहले बाढड़ा के निजी अस्पताल ले जाया गया और वहां हालत गंभीर होने के चलते उन्हें दादरी सिविल अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है जिसमें जगदीशचंद के दुखों की व्याख्या लिखी है। उन्होंने लिखा है कि मेरे बेटों के पास बाढ़ड़ा में 30 करोड़ की संपत्ति है, लेकिन उन के पास मुझे देने के लिए दो रोटी नहीं हैं। मैं अपने छोटे बेटे के पास रहता था। 6 साल पहले उसकी मौत हो गई।
सुसाइड नोट में जगदीश चंद्र ने लिखा है कि- मैं जगदीश चंद्र आर्य आपको अपना दुख सुनाता हूं। मेरे बेटों के पास बाढ़ड़ा में 30 करोड़ की संपत्ति है, लेकिन उन के पास मुझे देने के लिए दो रोटी नहीं हैं। मैं अपने छोटे बेटे के पास रहता था। 6 साल पहले उसकी मौत हो गई। कुछ दिन उसकी पत्नी ने उसे रोटी दी, लेकिन बाद में उसने गलत काम धंधा करना शुरू कर दिया। मेरे भतीजे को अपने साथ ले लिया।मैने इसका विरोध किया तो उनको यह बात अच्छी नहीं लगी। क्योंकि मेरे रहते हुए वे दोनों गलत काम नहीं कर सकते थे। इसलिए उन्होंने मुझे पीटकर घर से निकाल दिया। मैं दो साल तक अनाथ आश्रम में रहा और फिर आया तो इन्होंने मकान को ताला लगा दिया। इस दौरान मेरी पत्नी को लकवा आया और हम दूसरे बेटे के पास रहने लगे।
FIR में पुलिस को जगदीश ने अपने बेटे और बहू पर कार्रवाई करने की बात कही और साथ ही उन्होंने कहा उनकी सम्पत्ति बेटों को न देकर आर्य समाज को दान कर दी जाए। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने बेटे और पुत्रवधुओं पर 306 के अतंर्गत अभियोग दर्ज किया गया है जिसका अनुसंधान किया जा रहा है। जो भी तथ्य सामने आएगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

