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हरियाणा में कोरोना की दस्तक मिले 6 एक्टिव केस: रोहतक में फिर से होगी जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्टिंग; खांसी-जुखाम के मरीजों के टेस्ट के निर्देश

हरियाणा में कोरोना की एंट्री होने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए अब हेल्थ डिपार्टमेंट जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्टिंग की रोहतक लैब में ही तैयारी शुरू करने जा रहा है। स्वास्थ्य महानिदेशक (DGHS) रणदीप पुनिया की ओर से सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।

साथ ही निर्देश दिए हैं कि सर्दी-खांसी या जुखाम वाले मरीजों के आरटीपीसीआर टेस्ट करने की हिदायत दी है।हेल्थ डीजी तैयारियों और हालातों का जायजा लेने के लिए सभी जिलों के अधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगे। इस मीटिंग में जिलों के स्वास्थ्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यालय से जुड़ेंगे।

2 हजार डेली हो रहे टेस्टगृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कोविड को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। यही वजह है कि अब डेली 2 हजार से अधिक टेस्ट किए जा रहे हैं। अब तक हरियाणा में कोविड के 6 एक्टिव केस हैं, जिन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया है।अच्छी बात यह है कि इनमें नए वैरिएंट JN.1 की पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इन सभी संदिग्ध सैंपलों को जांच के लिए भेजा है। संभावना है कि मंगलवार तक इनकी रिपोर्ट दिल्ली से आ जाएं।पॉजिटिव मरीजों में मिले ये लक्षणस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार हरियाणा में अब तक आए पॉजिटिव लोगों में हल्के कोविड लक्षण मिले हैं। उन्हें अब होम आइसोलेशन में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार 87 संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई है, जिनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। इनमें से 19 मरीज अपने टेस्ट परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर अभी कोई केस सूबे में नहीं आया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग हर मुश्किल घड़ी के लिए पूरी तरह से तैयार है।सरकार जारी कर चुकी गाइडलाइनसरकार ने तय किया है कि इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (ILI) और गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) के मरीजों का आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाएगा। बैठक में उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे केसों में आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य होना चाहिए। सूबे के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का कहना है कि कोविड-19 को नोटिफाई बीमारी घोषित करना चाहिए ताकि निजी अस्पतालों में कोई केस आए तो वह सीएमओ व सरकारी अस्पतालों को जानकारियां दें।

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