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हरियाणा में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने BJP छोड़ी:कल 10 साल बाद कांग्रेस में वापसी; राजनीति के ट्रेजेडी किंग बीरेंद्र, बांगर बेल्ट में दबदबा

हरियाणा की राजनीति में ट्रेजेडी किंग से लेकर बेबाक टिप्पणियों को लेकर मशहूर पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने भाजपा छोड़ दी है। उन्होंने बताया कि मैंने अपना इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा को भेज दिया है। मेरी धर्मपत्नी प्रेमलता ने भी बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कल हम अपने कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस में शामिल होंगे।

उनके बेटे हिसार से सांसद रहे बृजेंद्र सिंह पहले ही कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। बीरेंद्र सिंह 10 साल बाद कांग्रेस में वापसी कर रहे हैं।

जाटों के दबदबे वाले जींद और इससे लगते एरिया को बांगर बेल्ट कहा जाता है और इस इलाके में किसानों के बड़े नेता रहे सर छोटूराम के नाती बीरेंद्र सिंह की मजबूत पकड़ रही है। बीरेंद्र सिंह के परिवार का हिसार इलाके में भी बड़ा जनाधार है। एक बार खुद बीरेंद्र सिंह तो 2019 में उनके बेटे इस सीट से सांसद रहे हैं।

जींद की उचाना सीट से 5 बार विधायक और दो बार राज्यसभा और एक बार लोकसभा सांसद रह चुके बीरेंद्र सिंह 43 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद 2014 को लोकसभा चुनाव के बाद BJP में शामिल हो गए थे। कांग्रेस छोड़ने के पीछे की वजह उनके पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के साथ मतभेद रहे, लेकिन अब हुड्‌डा और बीरेंद्र सिंह फिर से एक-दूसरे के काफी करीब हो गए हैं।

2014 में भारतीय जनता पार्टी की लहर के चलते बीरेंद्र सिंह ने भी कांग्रेस से अपना 43 साल पुराना नाता तोड़ लिया। बीरेंद्र सिंह ने हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले 16 अगस्त 2014 को बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद बचे हुए 2 साल के कार्यकाल में वे बीजेपी की तरफ से फिर से राज्यसभा सांसद बने और उनकी पत्नी प्रेमलत्ता ने उचाना सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए दुष्यंत चौटाला को हरा दिया।

2014 में ही पहली बार बीरेंद्र सिंह को मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में केंद्र में मंत्री बनाया गया। उन्हें काफी हेवीवेट ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय और पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय का प्रभार दिया गया

जींद, हिसार, फतेहाबाद सहित आसपास के जिलों में चौधरी बीरेंद्र सिंह के परिवार की अच्छी पकड़ रही है। इस इलाके में उनके परिवार की पकड़ का ही असर था कि जब इमरजेंसी का दौर खत्म होने के बाद, वर्ष 1977 में समूचे उत्तर भारत में जनता पार्टी की आंधी चल रही थी, तब बीरेंद्र सिंह ने जींद जिले की उचाना सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की।

तब जीत दर्ज करने वाले वह कांग्रेस के इकलौते नेता थे। वह बीरेंद्र सिंह का पहला ही विधानसभा चुनाव था। उन्होंने उस समय लोकदल के टिकट पर मैदान में उतरे रणबीर चहल बड़ौदा को हराया था। उस समय हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया था। चौधरी बीरेंद्र सिंह से कांग्रेस में वापसी करने से इस इलाके में कांग्रेस को मजबूती मिल सकती है।

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