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रोहतक में खाकी पर फिर लगे दाग:पूर्व सरपंच के भाई को बैंक भगौड़ा बता किया प्रताड़ित, जांच में इसी नाम का मिला दूसरा आरोपी

रोहतक में खाकी वर्दी पर सवाल उठे हैं। पुलिस ने जिले के गांव सैमाण के पूर्व सरपंच के भाई को एक मामले में भगौड़ा बताते हुए गिरफ्तार कर लिया और फिर उसे प्रताड़ित किया। जांच-पड़ताल में उसी का हमनाम एक दूसरा व्यक्ति आरोपी निकला। लोगों ने डीएसपी से आरो‌पी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। रोहतक पुलिस पर पिछले 15 दिनों में बेकसूर के साथ इस तरह का बर्ताव करने का यह दूसरा बड़ा मामला सामने आया है। इससे पहले लाखनमाजरा थाना पुलिस ने दो युवाओं को हत्या के आरोप में पीटा ‌था। इसमें एक युवक की आंख की रोशनी कम हो गई है। इसकी जांच अभी तक चल रही है।

जानकारी देते हुए गांव सैमाण के पूर्व सरपंच राजबीर सैमाणिया ने बताया कि उसका छोटा भाई सुरेश पुत्र रघबीर है। सुरेश पेशे से किसान है। आज सुबह करीब 10 बजे सुरेश के घर पर महम थाना से दो पुलिस‌कर्मी कृष्ण और कुलदीप सिविल ड्रेस पहन गाड़ी में सवार होकर आ धमके। उन्होंने घर पर आते ही सुरेश को पकड़ लिया और गाली गलौज करते हुए उसे गाड़ी में डाल लिया। थाने ले जाकर उसे प्रताड़ित किया और बैंक भगौड़ा होने का बताते हुए उसे यातनाएं दी। इस बारे में जब परिवार के लोग थाने पहुंचे और एसएचओ से कहा कि सुरेश के खिलाफ बैंक की ओर से आए भगौड़े वाले कागजात दिखाए जाए। कागजात चेक किए तो उसमें इसी नाम और पिता के नाम वाले दूसरे गांव के शख्स का नाम था। जिसके बाद पुलिस को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने परिजनों से कहा कि वे सुरेश को अपने साथ ले जा सकते हैं। मगर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने कहा कि इसे पुलिस एडमिट करवा कर गई थी, हम पुलिस को ही सौंप सकते हैं। आरोप है कि उसे छुट्टी दिलवाने भी पुलिसकर्मी साथ नहीं जा रहे हैं। वह वहां पर सुबह से ही भर्ती है।

बैंक जाकर पुलिसकर्मियों ने मैनेजर से कहा कि इस सुरेश के भी वारंट जारी कर दो

परिजनों के भड़क जाने पर दोनों पुलिसकर्मियों ने कहा कि वे इस बारे में बैंक से जाकर भी वेरिफाई करेंगे। पुलिसकर्मियों के साथ-साथ परिजन भी बैंक पहुंचे। जहां भी कागजातों में इस सुरेश का नाम नहीं था। मगर इस सुरेश पर लोन बकाया था। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने मैनेजर पर दबाब बनाया कि वे इस सुरेश के नाम भी तत्काल वारंट जारी कर दें। बैंक मैनेजर ने ऐसा करने से मना कर दिया। गलती के बाद भी पुलिसकर्मियों के इस रवैया से आहत लोगों की भीड़ डीएसपी कार्यालय पहुंची और पूरे मामले से अवगत करवाया।

एसएचओ ने मानी गलती

महम थाना प्रभारी इंसपेक्टर शमशेर सिंह ने कहा कि ये दोनों पुलिसकर्मी पीओ स्टाफ से हैं, जो दोनों ही बैंक आदि के भगौड़ों को पकड़ते हैं। इसी के चलते ये दोनों आज सुरेश को उठा लाए थे, जिसके पिता का नाम भी उस आरोपी के नाम और पिता के नाम से मिलता है, जिसे गिरफ्तार करना था। मगर असल आरोपी के पिता का नाम अलग है। यह गलती हो गई है। पूछताछ के बाद इस सुरेश को छोड़ दिया गया है। यह गलती हो गई है। इसे बा-इज्जत छोड़ दिया गया है।

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