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रोहतक से पूर्व इंडियन कैप्टन ने ठोकी टिकट की दावेदारी: ​​​​​​​बोले- मैं रोहतक का बेटा-भांजा; कमल खिलाउंगा

इंडियन कबड्‌डी टीम के पूर्व कैप्टन दीपक हुड्‌डा ने विधानसभा चुनाव को लेकर BJP की टेंशन बढ़ा दी है। दीपक हुड्‌डा ने रोहतक के महम से टिकट मांगी है। दीपक हुड्‌डा महम विधानसभा क्षेत्र में डोर टू डोर जाने के अलावा खेल मुकाबलों और अन्य कार्यक्रमों में भी शामिल हो रहे हैं। हुड्‌डा और स्वीटी 6 महीने पहले भाजपा में शामिल हुए थे।

भाजपा से टिकट की दावेदारी को लेकर सुर्खियों में आए दीपक हुड्‌डा ने मीडिया से बातचीत में महम से जीत का भी दावा ठोक दिया। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा उन्हें आशीर्वाद दे तो वह महम से कमल का फूल खिलाकर पार्टी को देंगे।

दीपक हुड्‌डा का जन्म रोहतक के गांव चमारिया में 10 जून 1994 को हुआ था। वे जब करीब 3 साल के थे तो उनकी मां मूर्ति देवी का निधन हो गया। वहीं जब वे 11वीं कक्षा में पढ़ते थे तो उनके पिता राम निवास का भी निधन हो गया। जिसके कारण परिवार का बोझ भी उनके कंधों पर आ गया। जिसके कारण उन्हें बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी और एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की नौकरी करनी पड़ी और बच्चों को पढ़ाने लगे। 2 साल तक उन्होंने प्राइवेट स्कूल में टीचर की नौकरी की।

दीपक हुड्‌डा के मुताबिक उन्होंने 2009 में कबड्‌डी खेलना शुरू किया था। शुरुआत में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। माता-पिता का साया भी सिर से छिन गया, इसके बाद भी कबड्‌डी को नहीं छोड़ा। वे कबड्डी का अभ्यास करने के लिए दूसरे गांव में जाते थे।

कबड्‌डी में कड़ी मेहनत के बल पर भारतीय कबड्‌डी टीम में शामिल हुए और शानदार प्रदर्शन करते हुए मेडल भी दिलाए। दीपक 2016 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थे। वहीं प्रो कबड्‌डी लीग में भी हिस्सा लिया। दीपक हुड्‌डा को प्रो कबड्‌डी लीग में सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर में से एक माने जाते थे।

दीपक हुड्‌डा की पत्नी अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सर स्वीटी बूरा ने भी हिसार की बरवाला विधानसभा सीट से सियासी दावेदारी ठोक है। स्वीटी बूरा का 10 जनवरी 1993 को हरियाणा के हिसार में एक किसान परिवार में जन्म हुआ था। स्वीटी बूरा को 2015-16 सीजन में मिली उनकी खेल उपलब्धियों के लिए हरियाणा सरकार ने 2017 में भीम पुरस्कार से नवाजा। स्वीटी बूरा की शादी 2 साल पहले कबड्‌डी खिलाड़ी दीपक हुड्‌डा के साथ हुई थी। इससे पहले पंच क्वीन के नाम से मशहूर वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर स्वीटी बूरा हिसार की बरवाला सीट से दावेदारी ठोक चुकी है।

मीडिया से दीपक हुड्‌डा की बातचीत के प्रमुख अंश..?

सवाल: खेल से राजनीति में आए, कैसा सफर रहा?जवाब: यहां तक का सफर काफी मुश्किलों भरा रहा। बचपन में ही मां-बाप का देहांत हो गया था। बड़ी बहन के पति की भी मौत हो गई थी। जिसके कारण भांजा-भांजी भी घर आकर रहने लगे। उनकी भी देखभाल करनी थी। अपनी पढ़ाई भी बीच में छोड़कर एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक के रूप में नौकरी भी की है।

सवाल: राजनीति में क्या टारगेट है?

जवाब: लक्ष्य तो मेरा राजनीति के जरिए समाज सेवा है। बहुत से खिलाड़ी गांवों में सुविधाओं की कमी से खेल छोड़ देते हैं। मैंने बुरा समय देखा लेकिन मेरा कोई भाई या बहन ऐसे हालात से न गुजरे, यह मेरी कोशिश है। 6-7 महीने से गांव-गांव जा रहा हूं तो लोग परेशानियां गिनाते हैं।

सवाल: जमीन से उठकर खेल व अब राजनीति में आएं। क्या आगे की तैयारी हैं।

जवाब: तैयारियां काफी अच्छी हैं। अब तक भारतीय जनता पार्टी का आशीर्वाद चाहिए। जनता का तो हमेशा ही सर्वोपरी होता है। लक्ष्य एक ही है कि समाज की इतनी सेवा करनी है कि पूरी दुनिया मुझे याद रखे।

सवाल: क्या आप इस बार चुनाव लड़ने के भी इच्छुक हैं या दावेदारी पेश की है?

जवाब: मैं मेहनत करना जानता हूं। बिना किसी एक रुपए व बिना किसी सहयोग के दिन-रात मेहनत की। 50-50 किलोमीटर रेस की। अब राजनीति में आया हूं, मेहनत तो इतनी कर दूंगा, चाहे 24 घंटे जागना पड़े। मेरे जैसे युवा को अगर भारतीय जनता पार्टी का आशीर्वाद मिला तो यह बोल रहा हूं कि जनता का पूरा आशीर्वाद मिलेगा।

सवाल: आपकी दावेदारी किस सीट पर है और क्यों?

जवाब: महम विधानसभा से टिकट मिले तो विधानसभा में कमल का फूल खिलेगा। महम में खेल जगत मेरे साथ है। दूसरा मैं महम का भांजा हूं। यहां कई खेल प्रतियोगिताएं कराईं। जो बड़े-बुजुर्ग और माताएं हैं, वे पहले चाहे किसी भी पार्टी से जुड़ी रही हो, जब उनका बेटा दीपक हुड्‌डा उनके सामने जाता है तो सभी आशीर्वाद देते हैं। सभी कहते हैं कि बेटा तेरी वोट जरूर देंगे। तेरे जैसा बालक इस राजनीति में आया है तो कुछ ना कुछ बढ़िया ही करेगा।

सवाल: भाजपा में और भी दावेदार हैं, खुद को बेहतर कैसे मानते हैं?

जवाब: यह फैसला पार्टी का होता है। शीर्ष नेतृत्व इसका फैसला करता है। मेरा काम है मेहनत व संघर्ष करना। अपनी पार्टी को मजबूत करना। जो भाजपा शीर्ष नेतृत्व फैसला करेगा, वह सर्वोपरि है। अगर आशीर्वाद मिला तो अपनी तरफ से 200 प्रतिशत मेहनत करूंगा और कमल खिलाकर दिखाउंगा।

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