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पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह का BJP पर हमला…बोले – हरियाणा के पानी पर समझौता बर्दाश्त नहींहरियाणा के हिस्से के पानी की एक-एक बूंद बचाएंगे

चंडीगढ़। हरियाणा और राजस्थान के बीच हुए नए जल समझौते को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक एवं हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इनेलो हरियाणा के जल अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि राज्य के हिस्से के पानी की एक-एक बूंद की रक्षा के लिए पार्टी सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

प्रो. संपत सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान के बीच हुआ नया जल समझौता प्रदेश के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पहले से ही जल संकट का सामना कर रहा है और ऐसे समय में राज्य के अधिकारों से समझौता करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका, जिससे हरियाणा को उसका वैधानिक पानी नहीं मिल पा रहा है।

‘पानी के मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस एक जैसी’

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि हरियाणा के जल अधिकारों के मामले में भाजपा और कांग्रेस की सोच में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस ने सत्ता बचाने के लिए हरियाणा के हितों से समझौता किया और अब भाजपा सरकार भी राजस्थान को पानी देने का फैसला लेकर उसी राह पर चल रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का पानी केवल हरियाणा का है और इनेलो इसके लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी।

1994 के समझौते से हरियाणा का हिस्सा घटा

उन्होंने बताया कि वर्ष 1954 के यमुना जल समझौते के बाद हरियाणा के गठन के समय प्रदेश को पंजाब के हिस्से का अधिकार मिला था। उस समय हरियाणा लगभग 8 बीसीएम और उत्तर प्रदेश करीब 4 बीसीएम पानी का उपयोग करता था।

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि 12 मई 1994 को हुए नए जल समझौते में हरियाणा का हिस्सा घटाकर 5.730 बीसीएम कर दिया गया, जबकि राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश को भी स्थायी हिस्सेदारी दे दी गई। इससे हरियाणा की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत से घटकर 46 प्रतिशत रह गई।

’30 साल बाद भी अधूरी हैं बांध परियोजनाएं’

इनेलो नेता ने कहा कि 1994 के समझौते में रेणुका, किशाऊ और लखवार-व्यासी बांध बनाकर यमुना में अतिरिक्त जल उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तीन दशक बीत जाने के बाद भी ये परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान ने ऊपरी क्षेत्रों में कच्चे बांध बनाकर प्राकृतिक जल प्रवाह को भी प्रभावित किया, जिससे हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा।

1994 में इनेलो विधायकों ने दिए थे इस्तीफे

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते के विरोध में तत्कालीन नेता ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इनेलो के सभी 17 विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उन्होंने इसे हरियाणा के जल अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी का ऐतिहासिक और सबसे बड़ा राजनीतिक बलिदान बताया।

अभय चौटाला की अध्यक्षता में बनेगी आगे की रणनीति

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही हरियाणा के वैध जल अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए जल्द ही इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला की अध्यक्षता में पार्टी की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की रूपरेखा पर निर्णय लिया जाएगा।

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