Site icon Digital Bhoomi – Haryana's Leading News Plate form and Weekly Newspaper Get latest Haryana News

रोहतक PGIMS में पहली बार बिना तार वाला लीडलेस पेसमेकर लगाया, कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने दी जानकारी

रोहतक, 16 अक्टूबर। पीजीआईएमएस के हृदय रोग विभाग ने वह कर दिखाया है जो आज तक हरियाणा के किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं हुआ था। कार्डियोलोजी विभागाध्यक्ष डाॅ. अश्वनी ने 66 वर्षीय मरीज के दिल में बिना तार वाला अत्याधुनिक लीडलेस पेसमेकर सफलतापूर्वक इंप्लांट कर प्रदेश की चिकित्सा के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। हरियाणा के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह अपनी तरह का पहला मामला है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने इस सफलता पर हृदय रोग विभाग के डाॅ. अश्वनी की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि हरियाणा के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की क्षमताओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी और स्वास्थ्य मंत्री सुश्री आरती राव जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को लगातार अत्याधुनिक मशीनें, नई तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
डाॅ. अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने कहा कि यह उन्होंने कहा कि अभी तक यह अत्याधुनिक सुविधा केवल बड़े-बड़े प्राइवेट अस्पतालों या महानगरों तक ही सीमित थी, लेकिन पीजीआईएमएस ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी संस्थान भी विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक तकनीक के साथ गरीब से गरीब मरीज का इलाज करने में सक्षम हैं। यह उपलब्धि विकसित भारत और स्वस्थ हरियाणा के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट विजन है कि हरियाणा के गरीब से गरीब व्यक्ति को भी वही इलाज सरकारी अस्पताल में मिले, जिसके लिए पहले उसे लाखों रुपये खर्च कर दिल्ली-गुरूग्राम के बड़े प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता था। आज पीजीआईएमएस रोहतक में कैथ लैब और लीडलेस पेसमेकर जैसी महंगी तकनीक उपलब्ध होना इसी का प्रमाण है। सरकार के सहयोग से पीजीआईएमएस अब केवल अस्पताल नहीं, बल्कि उत्तर भारत का सुपर-स्पेशियलिटी हब बनकर उभर रहा है।
मामला क्या था –
कार्डियोलोजी विभागाध्यक्ष डाॅ. अश्वनी ने बताया कि यह 66 वर्षीय मरीज रांची, झारखंड का रहने वाला है। उसे सिक साइनस सिंड्रोम था, जिसके कारण 11 जुलाई 2026 को पारंपरिक पेसमेकर लगाया गया था। बाद में उसी पेसमेकर वाली पॉकेट में गंभीर इंफेक्शन हो गया। मरीज 7 अक्टूबर को 10 दिन से लगातार बुखार के साथ पीजीआईएमएस की कार्डियोलॉजी ओपीडी में पहुंचा। पीईटी-सीटी स्कैन से इंफेक्शन की पुष्टि हुई। डाॅ. अश्वनी ने बताया कि हमने पहले आईवी एंटीबायोटिक देकर बुखार कंट्रोल किया, फिर संक्रमित पुराने पेसमेकर को पूरी तरह निकाल दिया। इसके बाद परिवार की सहमति से 14 अक्टूबर को लीडलेस पेसमेकर लगाने का फैसला लिया गया।
डाॅ. अश्वनी ने बताया कि चूंकि मरीज को पहले ही पॉकेट इंफेक्शन हो चुका था, दोबारा पॉकेट बनाना खतरनाक था। लीडलेस में पॉकेट ही नहीं बनती, इसलिए दोबारा इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है, सीने पर कोई बड़ा निशान या टांका नहीं आता, मरीज को रिकवरी भी जल्दी हो जाती है और वह अगले ही दिन चलने-फिरने लग सकता है।
बाॅक्स: कितना समय लगा: डाॅ. अश्वनी ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया केवल 35 से 45 मिनट में लोकल एनेस्थीसिया में पूरी की गई। पैर की नस (फेमोरल वेन) के रास्ते एक पतली ट्यूब के जरिए इस छोटे से कैप्सूल को सीधे दिल के दाएं वेंट्रिकल में पहुंचाकर फिक्स कर दिया गया। उन्होंने बताया कि उनके साथ डाॅ. तुषार, डाॅ. अमित, डाॅ. गोपी कृष्णा, टैक्निशियन अनुज, नर्सिग अधिकारी रेनू, नीलम ने भी सहयोग दिया।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा:
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री सुश्री आरती राॅव ने कहा कि पीजीआईएमएस के कार्डियोलोजी विभाग की यह सफलता पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लिए एक मिसाल है और भविष्य में हम इससे भी अधिक एडवांस तकनीकें लेकर आएंगे, ताकि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति को भी उच्च गुणवता की चिकित्सा सुविधा मिले।

Exit mobile version