रोहतक। एएसआई के बेटे व लॉ के छात्र झज्जर जिले के गांव दूबलधन माजरा निवासी 23 वर्षीय वीरेंद्र सिंह के पांच हत्यारोपियों को पुलिस सजा नहीं दिला सकी। एएसजे (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) डाॅ. भूपेंद्र सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी विक्की उर्फ बॉक्सर निवासी बामरौली, दिल्ली, हाल में चाणक्यपुरी कॉलोनी, दीपक उर्फ गुरु निवासी खरक जाटान, विजय निवासी जसराना, सोनीपत, राहुल उर्फ राठौर निवासी निंदाना व सोनीपत जिले के गांव भैंसवाल निवासी हार्दिक को बरी कर दिया। हार्दिक की उम्र वारदात के समय 18 साल से कम थी, लेकिन अदालत में आरोपी को बालिग मानकर केस चलाया गया।
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक, मई 2018 को झज्जर जिले के गांव दूबलधन माजरा निवासी अंकित ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दी थी कि वह ओमैक्स सिटी में कमरा लेकर रह रहा था।
रात करीब 10 बजे चचेरे भाई वीरेंद्र, दोस्त विकास निवासी रावलधी, जिला चरखी दादरी, चांदवीर निवासी मोरवाल जिला चरखी दादरी व जींद जिले के गांव करसौला निवासी अमित के साथ शीला बाईपास के नजदीक खाना खाने आए थे। खाना लेकर जैसे ही बाहर गली में आए तो एक सफेद रंग की कार आकर रुकी।
आरोप था कि विक्की उर्फ बॉक्सर ने वीरेंद्र के सीने में गोली मार दी। वीरेंद्र वहीं गिर गया और आरोपी कार में सवार होकर भाग गए। वे वीरेंद्र को पीजीआई ले गए, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया
केस में पुलिस की तरफ 24 गवाह बनाए गए। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि मौके के गवाहों ने कहा कि हमलावरों ने गोली मारने के साथ-साथ लाठी व डंडों से भी हमला किया जबकि मेडिकल रिपोर्ट में केवल गोली लगने का जिक्र है।
इसके अलावा, घटनास्थल से पुलिस ने कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं ली जबकि मौके पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। इनके अलावा होटल मालिक व अन्य लोगों को गवाह नहीं बनाया गया।
वारदात 2 मई 2018 को रात करीब 10 बजे हुई थी जबकि 3 मई को वीरेंद्र का जन्मदिन था। मां रीना ने फोन कर बेटे वीरेंद्र से कहा था कि आराम से सो जाईओ। कल तेरा जन्मदिन है। आफत मत तारियो।
जन्मदिन शुरू होने से डेढ़ घंटे पहले वीरेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस समय कहा गया था कि पहले हुई कहासुनी के चलते विक्की उर्फ बॉक्सर ने साथियों के साथ मिलकर वारदात अंजाम दी है। अब पुलिस आरोपों को साबित नहीं कर सकी और आरोपी बरी हुए हैं।

