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कैथल की MBBS फाइनल ईयर की छात्रा ने किया सुसाइड, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में फंदा से लटका मिला शव

 कैथल। बेटी डॉक्टर बनेगी, परिवार का नाम रोशन करेगी और वर्षों की मेहनत का सपना पूरा होगा। इसी उम्मीद के साथ कैथल जिले के गांव बाबा लदाना निवासी सतीश सैनी और उनकी पत्नी शालिनी ने बेटी शगुन सैनी की पढ़ाई पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर दिए। दोनों गेस्ट शिक्षक हैं और बेटी के बेहतर भविष्य के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे थे।

स्वजन बोले- बेटी को किसकी नजर लगी, हमारा तो सपना ही तोड़ दिया। बेटी से हर रोज बात होती थी, वह खुश रहती थी, बोलती थी एक साल रह गया, इसके बाद मैं डॉक्टर बन जाऊंगी। माता-पिता को क्या पता था कि उनकी बेटी इस तरह चली जाएगी।

मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही 23 वर्षीय शगुन की मौत से परिवार की उम्मीदें बिखर गईं। छात्रा ने सोमवार रात हास्टल के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। स्वजन का कहना है बेटी बचपन से पढ़ाई में अव्वल रही, अपनी कक्षा में अव्वल आती थी। स्वजन के पास सोमवार रात को कॉलेज से फोन आया और लड़की के सुसाइड की सूचना दी

परिवार में शगुन का छोटा भाई भी है, जो अंबाला के पास एक निजी संस्थान से एमबीबीएस कर रहा है, यानि परिवार की दोनों संतानों को डॉक्टर बनाने का सपना था। शगुन के दादा बिजली निगम में जेई के पद से सेवानिवृत्त हैं। परिवार के पास जमीन भी है और खेती-बाड़ी करते हैं। बच्चों के भविष्य के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे।

चार साल पहले शगुन ने एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। स्वजन का कहना है कि शगुन का सपना एक अच्छी डॉक्टर बन समाज की सेवा करना था। उसकी पढ़ाई पर अब तक करीब एक करोड़ रुपये खर्च हो चुके। माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई और भविष्य को लेकर बड़े सपने संजोए थे। ऐसे में उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

स्वजन के अनुसार अगर बेटी को कोई परेशानी थी तो वह परिवार को बता सकती थी। हालांकि, शगुन की मौत के पीछे की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी। पुलिस के अनुसार शगुन की रूम पार्टनर से पूछताछ में किसी दोस्त के साथ अक्सर विवाद होने की बात सामने आई है।

मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को गांव में लाया गया और अंतिम संस्कार किया गया। माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। स्वजन का कहना है कि एमबीबीएस करने के बाद लड़की के पीले हाथ करने थे। कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

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