भोपाल के हमीदिया अस्पताल कैंपस के कमला नेहरू अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में सोमवार देर रात आग लग गई। हादसे में 7 बच्चे झुलस गए। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में चारों ओर परिजनों की चीत्कार, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की आवाज सुनाई दे रही थी। कोई भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं था। हर तरफ अफरा-तफरी मची थी।
Bhopal के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया के कैम्पस में बने कमला नेहरू गैस राहत हॉस्पिटल में सोमवार रात 9 बजे आग लग गई थी। आग अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बच्चा वार्ड के SNCU में लगी। यहां 40 बच्चे भर्ती थे। बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट हादसा हुआ और पीडियाट्रिक वेंटिलेटर ने आग पकड़ ली। फिर ये आग उस वॉर्मर तक पहुंच गई, जिसमें बच्चों को रखा गया था।
अग्निकांड में 7 बच्चे जिंदा जल गए हैं, हालांकि अभी भी चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग 4 बच्चों की मौत का ही दावा कर रहे हैं। नवजातों को बचाते समय 3 नर्स और एक वार्ड बॉय भी बेहोश हो गए थे। जिस वक्त आग लगी, तब इस थर्ड फ्लोर पर 127 बच्चे अलग-अलग वार्डों में भर्ती थे। हादसे के बाद 6 बच्चों को जेपी अस्पताल शिफ्ट करवाया है। रात साढ़े 12 बजे फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम ने आग पर काबू पाया।
बताया जा रहा है कि जिस चिल्ड्रन वार्ड में आग लगी, उसे नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाना था। अफरा-तफरी के बीच नवजात बच्चों को संभालना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन चिंतित परिजनों को समझाना भी मुश्किल काम था। पुलिस जवान और फायरकर्मी बेकाबू परिजनों को संभालने में लगे थे। यहां परिजन जिस वार्ड में बच्चों को रखा था, उसमें घुसने के लिए दरवाजे तोड़ने पर आमादा थे।
फायरकर्मी अदनान ने कहा कि सीढ़ियों से लेकर गलियारे तक में परिजन दौड़ रहे थे। चारों ओर धुआं था। घुटनों के बल चलते हुए वार्ड के अंदर पहुंचे। 3 बच्चों और एक बेसुध नर्स को बाहर निकालकर लाए। वार्डों में लपटें कम, धुआं ज्यादा था। सभी खिड़कियों के कांच तोड़े, ताकि धुआं बाहर निकले।
बाग सेवनिया की पूनम ने बताया कि उनकी बेटी को काफी मन्नतों के बाद बेटा हुआ था। सोमवार को ही जन्म हुआ था। रात में वह, बेटी और नाती के पास थी। नर्स और वार्ड बॉय के बीच लड़ाई होने लगी। हम वार्ड से बाहर निकल गए। इसके 5 मिनट बाद ही आग लग गई। एक सिस्टर (नर्स) कह रही थी कि एक भी हंसते हुए नहीं, बल्कि रोते हुए जाएंगे। आग के पीछे बड़ी साजिश है।
जुड़वां बच्चों के पिता रमेश दांगी (राजगढ़) जो उस वक्त चिल्ड्रन वार्ड में दूध देने के लिए गए थे, उन्होंने स्टाफ के बाद वार्ड में सबसे पहले धुआं उठते देखा। उन्होंने खुलासा किया कि आग लगने के बाद वार्ड में मौजूद स्टाफ वहां से भाग चुका था। बार-बार गिड़गिड़ाने के बाद भी सिस्टर ने दरवाजा नहीं खोला।
रमेश दांगी ने बताया, ‘मैं बहुत गिड़गिड़ाया। कहा कि सबको बचा लेते हैं, पर उन्होंने गेट नहीं खोला। जब गेट नहीं खुला तो मन में आया कि इस धुएं में तो बच्चे मर जाएंगे। लात मारी, लेकिन गेट नहीं टूटा। कोहनी मारकर कई प्रयास के बाद दरवाजा तोड़ा तो देखा अंदर काला धुआं फैल चुका था। धुएं के कारण आंखों में इतने आंसू आने लगे कि बच्चों को भी नहीं देख सकता था कि वह कहां पर हैं। समय रहते दरवाजा खोल देते तो मैं अपने सहित सभी बच्चों को निकाल लेता।’
चश्मदीद रमेश दांगी के जुड़वां बच्चे हुए थे। इसमें एक बच्चा यहीं पर भर्ती था, जिसके लिए वह दूध देने गया था। वार्ड के बाहर से दूध देकर 10 कदम ही चला था कि अचानक धुआं उठता दिखा। तुरंत लौटा और अंदर भर्ती अपने बच्चे को बचाने के लिए गिड़गिड़ाने लगा। दांगी ने कहा, ‘मैंने सुबह ही पत्नी की छुट्टी के लिए बोला था, लेकिन छुट्टी नहीं मिली। इसे लेकर मैंने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की, लेकिन उन्होंने कहा कि इस मामले में वे कोई मदद नहीं कर सकते।’
सूत्रों ने बताया कि कमला नेहरू अस्पताल में PWD और CPA के इंजीनियरों व अधिकारियों ने देर रात उस वार्ड का निरीक्षण किया, जहां आग लगी थी। पता चला है कि जिस वार्ड में आग लगी, वहां 10 बेड थे। हर बेड पर एक वॉर्मर यूनिट लगी थी। इसमें से एक में खराबी होने से धुआं उठा, लेकिन स्टाफ ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इस कारण आग लग गई और पूरे वार्ड में धुआं हुआ। प्रारंभिक जांच में नवजातों की मौत दम घुटने से होने की आशंका जताई जा रही थी।
आग लगने और नवजातों की मौत पर सियासत भी गर्म हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर लापरवाही करने का बड़ा आरोप लगाया है। विधायक PC शर्मा और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना जायसवाल की पुलिस से हुज्जत भी हो गईं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा भी पहुंचे। पूर्व सीएम कमलनाथ भी दोपहर 1.30 बजे हॉस्पिटल में पहुंचे। इस दौरान जायसवाल को पुलिस ने भीतर जाने से रोक दिया।
बिल्डिंग में आग लगने से अब तक 7 बच्चों की मौतें हो चुकी हैं। इसके चलते जहां परिजन गमगीन है और हॉस्पिटल कैम्पस चीत्कारों से गूंज रहा है। वहीं, सियासत भी गर्म हो गई है। हादसे पर कांग्रेस शिवराज सरकार को आड़े हाथों ले रही है। विधायक शर्मा ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि पहले भी जब हॉस्पिटल में आग लगने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं तो फिर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए। महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जायसवाल ने भी हादसे के पीछे सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कैबिनेट की बैठक में कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल में डॉक्टर्स और नर्सों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को सुरक्षित निकाला। हालांकि, कुछ बच्चों को बचाया नहीं जा सका। शिवराज ने कहा कि अस्पतालों में कुछ व्यवस्था में बदलाव किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत गंभीर घटना है। यह आपराधिक लापरवाही है। जांच के निर्देश दे दिए गए हैं, जो भी दोषी होगा, उस पर सख्त एक्शन लिया जाएगा, लेकिन जिन लोगों ने अपनी जान हथेली पर रखकर 36 बच्चों को सुरक्षित निकाला है, उनका सम्मान किया जाएगा।
मंत्री बोले- वार्ड के अंदर की स्थिति बेहद डरावनी
प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि हो सकता है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी हो। उन्होंने कहा कि वार्ड के अंदर की स्थिति बेहद डरावनी है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल का मेंटेनेंस राजधानी परियोजना परिक्षेत्र (CPA) के हाथों में है। हालांकि, मुख्यमंत्री इसे बंद करने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया अभी तक यह सिर्फ कागजों पर ही सीमित है।

