रोहतक जिले में बरसात के कारण किसानों पर दोहरी मार देखने को मिल रही है। पहले ही धान की फसल कम हुई और ऊपर से मंडियों में धान की सरकारी खरीद नहीं हो रही। धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जो बरसात में भीग रहा है। प्रशासन की तरफ से किसानों की फसल को बचाने की उचित व्यवस्था तक नहीं है।
मंडी में किसान धान की फसल लेकर पिछले 10-12 से बैठे हुए है, लेकिन कोई भी सरकारी एजेंसी उनकी फसल को खरीदने के लिए नहीं पहुंच रही। किसानों को धान की ढेरी रखने के लिए शेड भी नसीब नहीं हो रहा, जिसके कारण खुले आसमान के नीचे ही धान पड़ा है, जो बरसात में भीगने के कारण खराब होने का अंदेशा है। इससे किसानों पर दोहरी मार देखने को मिलेगी।
रेवाड़ी के गांव कुशमापुर निवासी रामनिवास ने बताया कि उसकी फसल रेवाड़ी की मंडी में नहीं बिकी। फिर मातनहेल और झज्जर में भी फसल नहीं बिक पाई। एक अक्टूबर को रोहतक मंडी में 200 मण धान लेकर आया था, लेकिन यहां भी शेड के नीचे जगह नहीं मिली और खुले आसमान के नीचे ही फसल पड़ी हुई है।
रामनिवास ने बताया कि सड़क किनारे धान पड़ा होने के कारण कुछ तो गाड़ियों के नीचे आने से खराब हो गया और कुछ बरसात के पानी में बह गया। जो बचा हुआ धान है, वह भी नमी अधिक होने के कारण खरीदा नहीं जा रहा। सरकारी रेट 2 हजार 369 रुपए है, जबकि उनकी फसल के कोई 1500 तो कोई 1800 रुपए लगा रहा है। सरकार को उनका धान खरीदना चाहिए।
गांव बलियाना निवासी संजू ने बताया कि धान खरीद की व्यवस्थाएं कम है। सरकारी खरीद के लिए एजेंसी नहीं आ रही। सारा धान खुले में पड़ा है जो बरसात के कारण भीग रहा है। खरीद के लिए कोई एजेंसी नहीं आ रही और न आने की उम्मीद है। धान में नमी अधिक दिखाकर प्राइवेट एजेंसी 400 से 500 रुपए कम में धान की खरीद कर रही है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।
गांव कबूलपुर निवासी कैलाश ने बताया कि जिस एजेंसी को सरकार ने खरीद की जिम्मेदारी दी है, वो एजेंसी आ ही नहीं रही और न खरीद हो रही। 10 दिन से यहां बैठे है ओर रोजाना 500 रुपए का उनका खर्चा हो रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। दिनरात यहां धान की रखवाली के लिए रूकना पड़ता है।
कैलाश ने बताया कि धान की फसल खुले में पड़ी है जो बरसात में भीग रही है। जब मौसम खुला हुआ था, तब तिरपाल 600 रुपए में मिलता था। अब बरसात में यह भी हजार रुपए का मिलता है। किसान हर तरफ से परेशान है, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। डीसी सचिन गुप्ता भी आकर जा चुके है, लेकिन समाधान कोई नहीं हो रहा।
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