कमला नगर में डिस्पोजल ग्लास बनाने वाली फैक्ट्री में बुधवार सुबह करीब 11:45 शाॅर्ट सर्किट से आग लग गई। फैक्ट्री के अंदर रह रहे तीन बच्चे और एक महिला आग की लपटों के बीच कमरे में घिर गए। फायर विभाग के कर्मचारियों ने जान पर खेलकर महिला और तीनों बच्चों को बाहर निकाला। आग पूरी फैक्ट्री में फैलने के साथ ही दूसरी मंजिल पर पहुंच गई थी। जिसे काबू पाने के लिए फायर विभाग के कर्मचारियों को करीब चार घंटे से अधिक का समय लगा।
कमला नगर निवासी मुकेश कुमार की डिस्पोजल ग्लास बनाने की फैक्ट्री है। बुधवार को कर्मचारी फैक्ट्री में काम कर रहे थे, तभी शाॅर्ट सर्किट से फैक्ट्री में आग लग गई, जिसे बुझाने को कर्मचारियों ने प्रयास किया। लेकिन सफलता नहीं मिली। चंद मिनटों में आग पूरी फैक्ट्री में फैल गई। मशीनों के साथ अन्य सामान भी लपटों के बीच घिर गया। वहीं फैक्ट्री के अंदर बने कमरे में रह रहे तीन बच्चे और एक महिला भी लपटों में फंस गई। तभी सूचना पर फायर विभाग के कर्मचारी और अधिकारी दमकल के साथ मौके पर पहुंचे।
अग्नि प्रतिरोधी ड्रेस न पहने होने के बावजूद फैक्ट्री के पीछे की दीवार तोड़कर दमकल टीम कमरे में घुसी और फंसे तीनों बच्चों के साथ महिला को बाहर निकाला। आग बुझाने के लिए फायर स्टेशन से अन्य गाड़ियों को मौके पर बुला लिया गया। आठ गाड़ियों के प्रयास से करीब चार घंटे में फैक्ट्री में लगी आग पर काबू पाया। फैक्ट्री में करीब 50 लाख के नुकसान का अनुमान जताया गया है।
कागज के डिस्पोजल ग्लास बनाने की फैक्ट्री जिस क्षेत्र में संचालित की जा रही थी वह आवासीय काॅलोनी है। फैक्ट्री के बारे में फायर स्टेशन के अफसरों तक को जानकारी नहीं थी। यदि आग रात के समय लगती तो और बड़ा हादसा हो सकता था। समय रहते सूचना मिलने के बाद भी आग पूरी फैक्ट्री में फैल चुकी थी।
प्रभारी फायर स्टेशन राजवीर सिंह ने कहा कि आग बुझाने में करीब चार घंटे का समय लगा है। फैक्ट्री आवासी क्षेत्र में संचालित हो रही थी, जो गलत है, फैक्ट्री की दीवार तोड़ने से पहले आग की बीच से होकर गुजरने का प्रयास किया, लेकिन आग पूरी फैक्ट्री में फैली थी। इसलिए जैसे ही पता चला कि फैक्ट्री के पीछे गली है। वहां से दीवार तोड़कर अंदर गए। महिला दीवार के सहारे सहमी हुई बैठी थी। तीन बच्चे बेसुध थे। सभी काे समय रहते निकाल लिया।
कमरे के अंदर दम घुटने के साथ ही सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी। कमरे के अंदर घुसकर महिला व तीनों बच्चों को जल्दी बाहर निकाल लिया गया। इस बीच सांस लेने में भी काफी दिक्कत हो रही थी। कमरे से बाहर गली में आने पर कुछ राहत मिली। इस बीच आग पर काबू पाना भी चुनौती था। दीवार तोड़कर जैसे ही कमरे में घुसे तो लपटों के कारण कमरा हीट हो रहा था। सांस लेने में काफी दिक्कत आ रही थी। लेकिन एक साथ चार जानों को बचाना पहली प्राथमिकता थी। महिला और तीनों बच्चों को बाहर निकालने के बाद ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। प्राथमिक उपचार दिया गया। सभी की हालत में सुधार हुआ है।
राजवीर सिंह के मुताबिक फैक्ट्री में आग की सूचना मिली थी, यह नहीं पता था कि कोई अंदर भी फंसा है। ऐसे हालातों के लिए स्पेशन आग प्रतिरोधी ड्रेस होती है। लेकिन हमने नॉर्मल ड्रेस में ही जान को जोखिम में डाल महिला और तीन बच्चों को बचाया। 15 मिनट लेट होते तो शायद जानें न बचतीं।

