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रोहतक में डेढ़ साल की बच्ची का नेत्रदान, परिवार ने दुख की घड़ी में लिया बड़ा फैसला

रोहतक, 16 अक्टूबर 2026। हरियाणा के रोहतक जिले में डेढ़ साल की बच्ची आस्था की मौत के बाद उसके परिवार ने नेत्रदान कर मिसाल पेश की है। तेज बुखार के चलते बच्ची की जान चली गई, लेकिन परिवार के इस फैसले से किसी जरूरतमंद की जिंदगी में रोशनी आने की उम्मीद जगी है। भिवानी से पहुंची मेडिकल टीम बच्ची के नेत्र लेकर पीजीआई के आई बैंक गई।

खेलते समय अचानक बिगड़ी तबीयत

महम निवासी दीपक परुथी ने बताया कि 14 अक्टूबर की शाम उनकी बेटी आस्था आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिवार ने उसे दवाई दी, लेकिन बुखार कम नहीं हुआ और उसकी हालत लगातार खराब होती गई। परिजनों के मुताबिक, बच्ची को 106 डिग्री बुखार था।

15 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े चार बजे परिवार बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचा। डॉक्टरों ने उसकी हालत को देखते हुए पीजीआई रेफर कर दिया। परिजन उसे पीजीआई ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही पिता की गोद में आस्था ने दम तोड़ दिया।

डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता, मां का था दूसरा सपना

आस्था का जन्म 18 फरवरी 2025 को हुआ था। परिवार में उसका एक तीन साल का भाई भी है। बेटी के जन्म से घर में खुशियां बढ़ गई थीं। वह धीरे-धीरे बोलना सीख रही थी और कुछ महीनों से चलने भी लगी थी। पिता दीपक उसे बड़ी होकर डॉक्टर बनाना चाहते थे, जबकि मां का सपना था कि बेटी सिविल सर्विस में जाए। अचानक हुई इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पहले से भर रखा था अंगदान का फॉर्म

दीपक अपने भाई सोनू के साथ होलसेल का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार एक धार्मिक संस्था से जुड़ा हुआ है। परिवार ने पहले ही मृत्यु के बाद नेत्रदान और देहदान का संकल्प लेते हुए फॉर्म भर रखा था। बेटी की मौत के बाद भी परिवार ने अपना संकल्प निभाया और उसके नेत्रदान का फैसला लिया।

रोहतक में पहली बार डेढ़ साल की बच्ची का नेत्रदान

सिविल अस्पताल से सेवानिवृत्त नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश शर्मा के अनुसार, रोहतक जिले में डेढ़ साल की बच्ची के नेत्रदान का यह पहला मामला है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशु से लेकर 90 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति के नेत्रदान किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिवार को प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा।

दुख की घड़ी में लिया गया परिवार का यह फैसला समाज को मानवता और दूसरों के जीवन में रोशनी लाने का संदेश देता है।

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