सरपंचों की ओर से बीडीपीओ कार्यालयों में लगातार धरना दिया जा रहा है। इसी के चलते अब उनका विरोध भी बढ़ता जा रहा है। बुधवार को सरपंचों ने ऐलान किया कि उनकी ओर से अब 3 फरवरी काे गुरुग्राम में सीएम मनोहर लाल की रैली का विरोध किया जाएगा।
सरकार को समय दिया गया था कि वे सरपंचों की समस्या को समझें और ई-टेंडरिंग और राइट टू रिकॉल को वापस लें, इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। बुधवार को राज्य सभा सदस्य दीपेन्द्र हुड्डा ने सांपला में ई-टेंडरिंग खिलाफ धरनारत सरपंचों के बीच पहुंचकर मांगों का पूर्ण समर्थन किया।
प्रदेशों में भाजपा सरकारें हैं वहां सरपंचों को अधिकार हैं तो फिर हरियाणा में क्यों नहीं? ये भी सवाल किया कि अगर पंचायतों को अधिकार ही नहीं देने थे तो चुनाव क्यों कराया गया? राईट टू रिकॉल केवल सरपंचों के लिये ही क्यों विधायक, सांसद समेत सभी पर लागू करे सरकार। मांग जायज है और वो पूरी तरह से उनके साथ हैं। सरकार को जिद छोड़कर सरपंचों के अधिकार में वृद्धि करनी चाहिए और फैसले को वापस लेना चाहिए।
सरकार द्वारा पंचायतों के जो अधिकार छीने जा रहे हैं सरकार आने पर वापस दिया जायेगा और पहली कलम से पंचायती राज के 29 अधिकारों को एक-एक कर देने का काम करेंगे। फैसले से न सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ेगा बल्कि पंचायतें अपने स्तर पर गली-नाली तक नहीं बनवा पाएंगी।
रोहतक बीडीपीओ कार्यालय में धरने पर कबूलपुर सरपंच अमर, सतेंद्र आसन, घिलौड़ कलां से अनिल देशवाल, मायना से प्रवीन, सिंहपुरा से सुमित, संदीप लाढ़ौत, जगवीर सिंहपुरा खुर्द, जसवंत मकड़ौली, संजय बहुजमालपुर, मनजीत कटवाड़ा, बिजेंद्र खिड़वाली व अन्य मौजूद रहे।

