रोहतक। गोकर्ण स्थित अंबेडकर भवन के मुख्य गेट के बाहर नालों की हालत बदहाल है। नाले टूटे हुए हैं और उनकी स्थिति देखकर मरम्मत कार्य पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सवाल उठाया जा रहा है कि जब इन नालों की मरम्मत के लिए करीब छह महीने पहले ठेकेदार को ढाई लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है, तो इसके बावजूद नालों की हालत ऐसी क्यों है?
मरम्मत के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति?
मामले में सबसे बड़ा सवाल मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और भुगतान को लेकर उठ रहा है। यदि नालों की मरम्मत के लिए भुगतान किया गया था, तो मौके पर काम की स्थिति की जांच होनी चाहिए। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि ठेकेदार ने मरम्मत का काम कब और किस स्तर तक पूरा किया था।
भुगतान और काम की जांच की मांग
अंबेडकर भवन के मुख्य गेट के बाहर टूटे नालों की स्थिति को लेकर संबंधित विभाग से जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। जरूरत है कि अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड तथा कराए गए कार्य की गुणवत्ता की जांच करवाएं।
सवाल यह है कि जब मरम्मत के नाम पर ढाई लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, तो नालों की हालत अब तक क्यों नहीं सुधरी?
