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Mohini Ekadashi के दिन ये काम करने से नाराज हो जाएंगे भगवान विष्णु, नहीं मिलेगा व्रत का फल!

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बता दें कि वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मोहिनी एकादशी व्रत रखा जाएगा। इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से सभी दुख-दर्द दूर दो जाते हैं। इस बार ये व्रत 1 मई 2023 को सोमवार के दिन रखा जाएगा। मोहिनी एकादशी व्रत का बेहद कठोरता से और विधिवत पालन किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से जाने-अनजाने में किए गए पाप खत्म हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि मोहिनी एकादशी व्रत के दौरान क्या करें और क्या नहीं। लेकिन इससे पहले जानते हैं आखिर क्यों इस दिन को कहा जाता है मोहिनी एकादशी…

स्कंद पुराण के अनुसार इस दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश प्रकट हुआ था। जिसे लेकर देवताओं और दानवों में युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई। भगवान विष्णु ने दानवों से अमृत कलश की रक्षा के लिए स्वयं मोहिनी रुप लिया और उस कलश की दानवों से रक्षा की। इसके बाद भगवान विष्णु ने देवताओं को अमृतपान करवाया। फिर देवताओं का संहार करके पूर्णिमा के दिन देवताओं को साम्राज्य प्राप्त हुआ।

एकादशी के दिन क्या करें…

सुबह स्नान करने के बाद सबसे पहले तुलसी में जल अर्पित किया जाता है। 

भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लिया जाता है। 

मोहिनी एकादशी व्रत के दौरान भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की भी विशेष पूजा की जाती है। साथ ही दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का अभिषेक किया जाता है।

दिन भर किसी भी प्रकार का अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है,हालांकि फलाहार ग्रहण किया जा सकता है।

दिन में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।

दिन में मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर जरुरतमंदों के बीच दान किया जाता है।

किसी मंदिर में भोजन और अन्न का दान किया जाता है।

शाम के समय तुलसी के नीचे दीया जलाया जाता है और उसकी परिक्रमा की जाती है।

शाम के समय भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाती है। 

मोहनी एकादशी के दिन ना करें काम

शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी का व्रत करने वालों को सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए।

इस दिन गुस्सा न करें, साथ ही घर-परिवार में घर में किसी भी तरह का झगड़ा या क्लेश करने से बचें।

 व्रत के दौरान लहसुन-प्याज और अन्य किसी भी तरह की तामसिक चीजों का सेवन से नहीं किया जाता है।

किसी भी तरह का नशा नहीं किया जाता है और ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है।

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