हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता हैं। इस दिन भगवान धनवंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। इस दिन नई चीजों की खरीदारी शुभता का प्रतीक मानी जाती हैं। लेकिन इस त्योहार पर खरीदारी के अलावा कुछ खास बातों पर भी ध्यान देना जरूरी हैं। आइए जानते हैं धनतेरस के दिन कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए। हैं।
धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदना बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन खरीदी गई नई झाड़ू पूजा के स्थान पर रखें और इसका प्रयोग दीपावली की सुबह से करें. साथ ही घर में रखी पुरानी या टूटी झाड़ू को धनतेरस की मध्य रात्रि में घर से बाहर कर दें।
दिवाली से पहले लोग घर के कोने-कोने की सफाई करते हैं, लेकिन अगर आपके घर में धनतेरस के दिन तक कूड़ा-कबाड़ या खराब सामान पड़ा हुआ है तो इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होगा। इसलिए आज ही घर से खराब या टूटा-फूटा सामान बाहर निकाल फेंके
घर के मुख्य द्वार या मुख्य कक्ष के सामने तो बेकार वस्तुएं बिल्कुल भी ना रखें, मुख्य द्वार को नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता हैं। माना जाता है कि घर के मुख्य द्वार के जरिए घर में लक्ष्मी का आगमन होता है इसलिए ये स्थान हमेशा साफ-सुथरा रहना चाहिए, घर के मुख्य द्वार पर भी आज ही साफ-सफाई की व्यवस्था कर लें।
अगर आप धनतेरस पर सिर्फ कुबेर की पूजा करने वाले हैं तो ये भी एक बड़ी गलती हो सकती है, इस दिन कुबेर के साथ मां लक्ष्मी और भगवान धनवंतरी की भी उपासना का विधान होता है इसलिए मां कुबेर के साथ मां लक्ष्मी और धनवंतरी की भी मूर्ति की व्यवस्था कर लें।
धनतेरस के दिन दोपहर या शाम के समय सोने से बचना चाहिए ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती हैं। आज चाहें तो दोपहर में थोड़ा सा आराम कर सकते हैं इस दिन संभव हो सके तो रात्रि जागरण करें।
धनतेरस के दिन घर में बिल्कुल कलह ना करे। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो घर की स्त्रियों का सम्मान करें, आज के दिन लड़ाई-झगड़े से दूर रहें
धनतेरस के दिन किसी को भी उधार देने से बचें, इस दिन अपने घर से लक्ष्मी का प्रवाह बाहर ना होने दें, कर्ज या उधार से जुड़ा लेन-देन दिवाली के बाद ही करें तो बेहतर होगा।
धनतेरस के दिन लोहे का कोई भी सामान न खरीदें। इस दिन लोहा खरीदना शुभ नहीं माना जाता हैं। माना जाता है कि इस दिन लोहा खरीदने से घर में दरिद्रता आती हैं।
इस दिन नकली मूर्तियों की पूजा ना करें, सोने, चांदी या मिट्टी की बनी हुई मां लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा करें। स्वास्तिक और ऊं जैसे प्रतीकों को कुमकुम, हल्दी या किसी शुभ चीज से बनाएं, नकली प्रतीकों को घर में ना लाएं।

