अश्विनी माह के शारदीय नवरात्रि इस बार 4 अक्टूबर यानी आज समाप्त हो रहे हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन नवमी तिथि को देवी सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। दुर्गा के नौ रूपों का पूजन करते हुए और उनकी साधना करते हुए इस तपस्या का जो भी परिणाम मिलता है, वह देने वाली देवी सिद्धिदात्री हैं। देवी सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली देवी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर को भी देवी सिद्धिदात्री की कृपा से अर्धनारीश्वर होने की शक्ति प्राप्त हुई थी। देवी का पूजन व उनकी प्रसन्नता प्राप्त किए बिना नवरात्रि के ये पावन दिन संपूर्ण नहीं होते। नवमी तिथि पर देवी सिद्धिदात्री का पूजन और इस दिन हवन यज्ञ करने का विशेष लाभ मिलता है। छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन करते हुए आज के दिन देवी को खीर का भोग अवश्य लगाएं। भोग की वस्तुओं में पंच मेवे का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही आज के दिन हवन व यज्ञ का भी विशेष प्रावधान है। जिससे कि घर-परिवार में सकारात्मकता का प्रवाह रहता है।
प्रातः काल में देवी के विग्रह का ध्यान करते हुए उनका पूजन करें। स्वच्छता का ध्यान रखते हुए घर में भोग बनाएं और सर्वप्रथम भगवान गणेश का ध्यान करते हुए नौ देवियों का ध्यान करें। इसके पश्चात भोजन का भोग लगाते हुए देवी सिद्धिदात्री से सभी देवियों की प्रसन्नता की कामना करें।
घर में हवन यज्ञ करने के पश्चात ब्राह्मण भोज अवश्य करवाएं। इसके उपरांत कन्याओं को घर में निमंत्रण देकर भोजन करवाएं। उन्हें जाते समय यथाशक्ति दक्षिणा अवश्य दें।
आज के दिन सुकर्मा योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही मंगलवार के दिन नवमी तिथि पढ़ने से इसकी सुविधा और भी अधिक बढ़ जाती है। सभी प्रकार के कार्य सिद्धि की कामना देवी से करने के साथ-साथ सुख व शांति के लिए आज के दिन लोगों को रोटी अवश्य डालें।

