ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 17 जुलाई यानी आज देवशयनी एकादशी है। यह पर्व हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जा रही है। साथ ही उनके निमित्त व्रत-उपवास भी रखा जा रहा है। ज्योतिषियों की मानें तो देवशयनी एकादशी पर कई मंगलकारी शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी

ज्योतिषियों की मानें तो देवशयनी एकादशी पर शुभ और शुक्ल योग का निर्माण हो रहा है। शुभ योग सुबह 07 बजकर 05 मिनट तक है। इसके बाद शुक्ल योग का निर्माण हो रहा है, जो पूर्ण रात्रि तक है। इस योग का समापन 18 जुलाई को सुबह 06 बजकर 13 मिनट पर होगा।

ज्योतिषियों की मानें तो देवशयनी एकादशी पर अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इन दोनों योग का निर्माण सुबह 05 बजकर 34 मिनट से हो रहा है और समापन 18 जुलाई को देर रात 03 बजकर 13 मिनट पर होगा। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी।

ज्योतिषियों की मानें तो देवशयनी एकादशी पर भद्रावास योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन भद्रावास योग सुबह 08 बजकर 54 मिनट से लेकर संध्याकाल 09 बजकर 02 मिनट तक है। इस दौरान भद्रा स्वर्ग लोक में रहेंगी। भद्रा के स्वर्ग लोक में रहने के दौरान पृथ्वी पर उपस्थित समस्त जीवों का कल्याण होता है। इस दिन शिववास योग का निर्माण भद्रावास योग के बाद हो रहा है।

देवशयनी एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति सभी सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को जाता है।

देवशयनी एकादशी पूजा- विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।

घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।

भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।

भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।

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