प्रकाश, आस्था और उल्लास के महापर्व दीपावली का आगाज शहर के पौराणिक एवं आध्यात्मिक केंद्र डेरा श्री बाबा लक्ष्मणपुरी जी के प्रांगण में दिव्य तरीके से हुआ। धनतेरस की संध्या पर डेरा परिसर में भव्य दीपदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने एक साथ 21,00 दीये प्रज्वलित कर समूचे तीर्थ परिसर को अद्भुत अलौकिक स्वर्णिम आभा से नहला दिया।
यह आयोजन उपाचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कपिलपुरी महाराज की गरिमामयी छत्रछाया और कुशल देखरेख में संपन्न हुआ। स्वामी कपिलपुरी महाराज ने दीप प्रज्वलित करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि दीपदान केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भीतर के अंधकार, अहंकार और अज्ञानता को समाप्त कर समाज में समरसता और ज्ञान का प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। उन्होंने घोषणा की कि धनतेरस पर 2100 दीपकों का यह अद्भुत दृश्य तो बस शुरुआत है; दीपावली के मुख्य पर्व पर पूरे तीर्थ स्थल प्रांगण में ऐतिहासिक रूप से 21,000 दीये एक साथ जगमगाए जाएंगे। इसके लिए डेरा प्रबंधन और स्वयंसेवकों द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

इतिहास के झरोखे से: सिद्धि, सेवा और जन-आस्था का सदियों पुराना केंद्र :
रोहतक का ऐतिहासिक डेरा श्री बाबा लक्ष्मणपुरी जी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हरियाणा की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत का एक सशक्त स्तंभ है।

  • कठोर तपस्या से स्थापित सिद्ध पीठ: इस पवित्र डेरे की नींव संत शिरोमणि बाबा लक्ष्मणपुरी जी महाराज की कठोर साधना और जन-कल्याण के संकल्प से पड़ी थी। माना जाता है कि बाबा लक्ष्मणपुरी जी ने समाज को बुराइयों से मुक्त करने, भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाने और क्षेत्र में सुख-शांति स्थापित करने के लिए दीर्घकाल तक यहां साधना की थी।
  • जनकल्याण और अन्नक्षेत्र की परंपरा: डेरा लक्ष्मणपुरी जी की पहचान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रही है। यहां दशकों से निर्बाध रूप से चल रहा अन्नक्षेत्र (विशाल लंगर), नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं, गोशाला संचालन और निर्धन कन्याओं की सहायता जैसे सेवा कार्य इसे एक सच्चा ‘लोक कल्याण केंद्र’ बनाते हैं।
  • पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ती अटूट आस्था: मुख्य पीठ पर विराजमान रहे महान संतों और वर्तमान में महामंडलेश्वर व उपाचार्य स्वामी कपिलपुरी महाराज के सानिध्य में यह डेरा निरंतर प्रगति पथ पर है। दिवाली, होली और वार्षिक मेलों के अवसर पर न केवल रोहतक बल्कि पूरे हरियाणा और पड़ोसी राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

महा-दीपोत्सव: दिवाली की शाम 21 हजार दीयों से दिखेगा अयोध्या सा नजारा :
धनतेरस पर आयोजित 2100 दीपों के दान के साथ ही समूचा डेरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया है। महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। स्वामी कपिलपुरी महाराज ने बताया कि दिवाली की शाम आयोजित होने वाले महा-दीपोत्सव के लिए विशेष रूप से पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी के दीये तैयार कराए गए हैं। स्वयंसेवकों की अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं जो पूरे तीर्थ परिसर को दीपों की कलात्मक आकृतियों से सजाएंगी। उन्होंने शहर और आसपास के तमाम नागरिकों से अपील की है कि वे दीपावली की शाम परिवार सहित डेरा परिसर पहुंचे, इस भव्य दीपोत्सव के साक्षी बनें और दीप दान कर पुण्य लाभ कमाएं।

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