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दिल्ली होटल अग्निकांड…पिता का हाल जानने पहुंचे परिवार की मौतआखिरी कॉल में बोले- ‘भाई, शायद हम बच नहीं पाएंगे’

कभी कभी हादसे सिर्फ जान नहीं लेते वो अपने साथ ले जाते है साथ उम्मीद,पीढ़िया, सहारा और भी बहुत कुछ , ये हादसे अपने पीछे छोड़ जाते है दर्द तकलीफ चींखे सिसकना और बहुत कुछ. ..
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में जो भीषण आग लगी उसने गुरुग्राम के एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी, मां, दो बेटियों समेत परिवार के नौ सदस्यों की मौत हो गई। हादसे से पहले विवेक ने अपने रिश्तेदार को फोन कर कहा था, “भाई… शायद हम बच नहीं पाएंगे।” यह उनके जीवन के आखिरी शब्दों में शामिल हो गए।

जानकारी के अनुसार, विवेक अग्रवाल के पिता राधेश्याम अग्रवाल फेफड़ों के गंभीर संक्रमण के कारण दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। उनका हालचाल लेने और देखभाल करने के लिए पूरा परिवार दिल्ली पहुंचा था। अस्पताल के नजदीक होने के कारण परिवार ने मालवीय नगर स्थित होटल में दो कमरे बुक कराए थे। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह यात्रा उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी।

परिजनों के मुताबिक, आग लगने के दौरान होटल में तेजी से धुआं भर गया था और लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा था। इसी दौरान विवेक अग्रवाल ने अपने रिश्तेदार पुनीत गुप्ता को फोन किया। फोन पर उन्होंने घबराहट भरे स्वर में कहा कि शायद अब वे बच नहीं पाएंगे। पुनीत ने उन्हें गीला कपड़ा मुंह पर रखने और धुएं से बचने की सलाह दी, लेकिन आग और जहरीले धुएं के कारण परिवार को नहीं बचाया जा सका।

हादसे में विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तरजिनी अग्रवाल, मां प्रेमलता अग्रवाल, बेटियां जीविसा और वरिया के अलावा राजस्थान के किशनगढ़ से आए रिश्तेदार अशोक गोयल, कमला गोयल समेत परिवार के कुल नौ लोगों की मौत हो गई। सबसे दुखद बात यह रही कि सबसे छोटी सदस्य जीविसा एक दिन पहले ही बेंगलुरु से अपने दादा से मिलने दिल्ली पहुंची थीं, लेकिन उन्हें अपने दादा से मिलने का मौका भी नहीं मिला।

वहीं, परिवार के मुखिया राधेश्याम अग्रवाल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। जिस पिता की देखभाल के लिए पूरा परिवार दिल्ली पहुंचा था, अब वही पिता अपने परिवार के अधिकांश सदस्यों को खो चुके हैं।

गुरुग्राम के सेक्टर-46 स्थित विवेक अग्रवाल के घर पर मातम पसरा हुआ है। पड़ोसियों के अनुसार विवेक बेहद मिलनसार और सामाजिक व्यक्ति थे। उनकी पत्नी भी सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहती थीं, जबकि दोनों बेटियां पढ़ाई में होनहार थीं। पूरे इलाके में इस हादसे के बाद शोक का माहौल है।

इस बीच होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि होटल तक पहुंचने का रास्ता संकरा था और आग लगने की स्थिति में पर्याप्त निकास व्यवस्था दिखाई नहीं दी। बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद धुआं तेजी से पूरी इमारत में फैल गया, जिससे कई लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।

मालवीय नगर अग्निकांड में कुल 21 लोगों की मौत हुई है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और होटल की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी पड़ताल की जा रही है।

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