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हरियाणा में पटवार-कानूनगो सर्कलों के पुनर्गठन की रफ्तार धीमी, राजस्व प्रशासन पर बढ़ा दबाव

हरियाणा में राजस्व प्रशासन को मजबूत बनाने और बढ़ती आबादी के अनुसार पटवार व कानूनगो सर्कलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। नए पटवार और कानूनगो सर्कल बनाने में हो रही देरी पर भू-अभिलेख निदेशालय ने नाराजगी जताते हुए राज्य के सभी मंडल आयुक्तों और जिला उपायुक्तों (DC) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

निदेशालय की ओर से जारी पत्र में अधिकारियों से पूछा गया है कि जिलों में नए पटवार और कानूनगो सर्कलों के गठन तथा पुराने सर्कलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया किस स्तर पर है। इसके साथ ही अब तक हुई कार्रवाई और लंबित मामलों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा गया है।

राजस्व विभाग का मानना है कि नए पटवार और कानूनगो सर्कलों के गठन से भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार होगा, किसानों और आम लोगों को राजस्व सेवाएं समय पर मिल सकेंगी तथा पटवारियों पर कार्यभार भी कम होगा।

जानकारी के अनुसार कई जिलों में जनसंख्या वृद्धि, नए गांवों और शहरी विस्तार के बावजूद वर्षों से पटवार सर्कलों की सीमाओं में अपेक्षित बदलाव नहीं हो पाया है। इससे एक-एक पटवारी के पास रिकॉर्ड और राजस्व कार्यों का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट करने, इंतकाल, जमाबंदी, गिरदावरी और अन्य राजस्व कार्यों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

भू-अभिलेख निदेशालय ने इस मामले की जानकारी वित्तायुक्त (राजस्व) एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भी भेजी है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सरकार राजस्व प्रशासन के ढांचे को लेकर गंभीर है और लंबित पुनर्गठन प्रक्रिया को जल्द पूरा कराना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार विभाग ने जिलों से यह भी जानकारी मांगी है कि नए सर्कलों के गठन में कौन-कौन सी प्रशासनिक या तकनीकी बाधाएं सामने आ रही हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य स्तर पर समीक्षा कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

हरियाणा में भूमि रिकॉर्ड से जुड़े अधिकांश कार्य पटवारी और कानूनगो स्तर पर किए जाते हैं। आबादी बढ़ने और गांवों के विस्तार के कारण कई सर्कलों में कार्यक्षेत्र काफी बड़ा हो चुका है। ऐसे में लंबे समय से सर्कलों के पुनर्गठन की मांग उठती रही है। अब निदेशालय द्वारा रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है।

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