रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में दाखिलों में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है जिसके बाद रोहतक अदालत ने पात्र विद्यार्थियों के हक में फैसला सुनाया ।
सीवाईएसएस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक धनखड़ ने बताया कि एमडीयू एम.पी.एड के दाखिले 29 जुलाई 2024 से शुरू हो गए थे , दाखिलों के दौरान कुछ खिलाड़ियों ने फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर दाखिला ले लिया तभी अन्य खिलाड़ियों ने इसका विरोध किया और एमडीयू प्रशासन को इसके बारे में लिखित शिकायत दी , लेकिन उसके पश्चात भी एमडीयू प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया और उन विद्यार्थियों को के दाखिले रद्द नहीं किए।
दीपक धनखड़ ने बताया कि दाखिलों के दौरान ही एक छात्रा को एमडीयू के प्रोस्पेक्टस से बाहर होकर सुपर न्यूमेरिकल सीट में बैक डोर से दाखिला दे दिया गया जो कि नियमों के खिलाफ था , विद्यार्थियों ने उसकी भी शिकायत एमडीयू प्रशासन को की लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई । परेशान होकर छात्रों ने रोहतक अदालत का दरवाजा खटखटाया।
शिकायतकर्ता छात्र कपिल ने बताया कि 3 महीने तक माननीय अदालत श्री अमित श्योराण जी की कोर्ट में उनका कैस चलता रहा तभी एमडीयू प्रशासन ने बात बढ़ती देख जिन विद्यार्थियों का बैकडोर से दाखिला किया था उनका दाखिला रद्द कर दिया , लेकिन उन सीटों पर जिन विद्यार्थियों का दाखिला होना था जिसमें कपिल और रूपा नांदल शामिल हैं जिन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था उनको दाखिला नहीं दिया । जहां पर 3 महीने बाद 7 दिसंबर को श्री अमित श्योराण जी की कोर्ट ने एमडीयू प्रशासन को फटकार लगाई और कहा कि कपिल और रूपा नांदल इन सीटों के लिए पात्र हैं , इन्हें दाखिला दिया जाए लेकिन उसके पश्चात भी एमडीयू प्रशासन ने दाखिला देना में आना कानी कर रहे हैं ।
रोहतक कोर्ट में अधिवक्ता तरुण बुद्धिराज ने बताया कि माननीय कोर्ट के आदेशों की पालना न करने के बाद उन्होंने कोर्ट को इसके बारे में अवगत कराया जिसके बाद कोर्ट ने एमडीयू के रजिस्टर प्रोफेसर गुलशन तनेजा ,असिस्टेंट रजिस्ट्रार अशोक कुमार , डॉ अनार सिंह डुल ओएसडी रजिस्ट्रार समेत अन्य को कोर्ट की अवहेलना का नोटिस भेजा और मंगलवार को उन्हें कोर्ट में पेश होना के आदेश भेजे । लेकिन उन्होंने समय पर नोटिस न मिलने का हवाला देकर कोर्ट में पेश नहीं हुए ।
छात्र नेता दीपक धनखड़ ने कहा कि एमडीयू यूनिवर्सिटी किसी की बापौती नहीं है , उच्च स्तर पर बैठे एमडीयू अधिकारी अपनी मनमानी करनी बंद कर दें और अपने चहतों को लाभ पहुंचाना बंद करें ताकि किसी आम विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो । पिछले कुछ समय से प्रशासन विद्यार्थियों के साथ रंजिश करने के मामले में उलझा हुआ है , न की समस्याओं के समाधान करने में, जो की काफी निंदनीय है।

