Site icon Digital Bhoomi – Haryana's Leading News Plate form and Weekly Newspaper Get latest Haryana News

हांसी वाले बाबा विवाद गरमाया, जंतर-मंतर वाली टीचर ने रामपाल और आसाराम का भी किया जिक्र

हरियाणा के हांसी वाले बाबा दिनेश पुरी के खिलाफ छिड़ी कंट्रोवर्सी के बीच नया मोड़ आ गया है। एक तरफ जहां जाट आरक्षण आंदोलन से चर्चा में आए धर्मेंद्र हुड्डा और उनके समर्थक धाम पर ‘पाखंडवाद’ का आरोप लगाते हुए ताला लगाने और उसे बंद कराने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रोहतक की रहने वाली चर्चित शिक्षिका सुलेखा दलाल महंत के समर्थन में उतर आई हैं।

सुलेखा वही महिला हैं जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा के विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर सस्पेंड हुई थीं और अपने वायरल वीडियोज को लेकर विवादों में रही थीं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुलेखा दलाल ने धाम पर उठ रहे सवालों पर तीखा पलटवार करते हुए इसे अपनी आस्था का केंद्र बताया और दावा किया कि उनके घर बैठे अर्जी लगाने के बाद धाम से खुद कॉल आया था।

उन्होंने धर्मेंद्र हुड्डा की मुहिम को आड़े हाथों लेते हुए चुनौती दी कि अगर उनमें असली पावर है तो वे आसाराम और रामपाल जैसे बड़े-बड़े बाबाओं के डेरे बंद करवाकर दिखाएं, गरीबों के छोटे डेरों पर अपनी ताकत न आजमाएं।

सुलेखा दलाल का कहना है कि वे बचपन से ही बालाजी महाराज की अनन्य भक्त हैं और 18 सालों से उनसे जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि उनके मन में हांसी के श्री बालाजी धाम जाकर अर्जी लगाने की तीव्र इच्छा चल रही थी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि 20 जुलाई को धाम से उनके पास अचानक फोन आया।

सुलेखा के मुताबिक, जब उन्हें धाम से बुलावा आया तो उनके रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि जो बात सिर्फ उनके दिल और दिमाग में चल रही थी, वह धाम के सेवादारों तक बिना कहे कैसे पहुंच गई। इसके बाद 28 जुलाई को वे अपनी सहेलियों के साथ हांसी धाम पहुंचीं। वहां महंत के भाई ने उन्हें 25 से 29 जुलाई के बीच चल रहे दरबार में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

28 जुलाई को हांसी में नरेंद्र कौशिक के जागरण में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के साथ-साथ वे दरबार में भी हाजिर हुईं।

धाम में अपने अनुभव को साझा करते हुए सुलेखा ने बताया कि जब वे श्री बालाजी धाम पहुंचीं तो भक्ति भाव में उनके आंसू रुक ही नहीं रहे थे। जब वे मंच (स्टेज) पर गईं, तो उन्होंने वहां मौजूद श्रद्धालुओं से पूछा कि उन्हें कौन-कौन जानता है। उस समय वहां मौजूद करीब 4,000 से अधिक लोगों ने हाथ खड़े कर दिए।

सुलेखा ने कहा कि उस दौरान महंत दिनेश पुरी आंखें बंद किए बैठे थे, जिस पर उन्होंने महंत से आंखें खोलकर देखने को कहा कि बालाजी की कृपा से लोग उन्हें पहचानते हैं। इस पर महंत दिनेश पुरी ने उनसे कहा था कि आपके अंदर की दिव्य शक्ति को कोई नहीं जानता, लेकिन लोग आपको एक कलाकार के रूप में पहचानते हैं। सुलेखा का दावा है कि उनके जीवन में आए सभी सकारात्मक बदलाव और लोकप्रियता केवल बालाजी महाराज का ही चमत्कार है।

र्मेंद्र हुड्डा द्वारा धाम को पाखंड बताए जाने और ताला लगाने की चेतावनियों पर सुलेखा दलाल ने सख्त लहजे में पलटवार किया। उन्होंने कहा कि “बालाजी की भक्ति कोई पाखंड नहीं है, और यदि यह पाखंड है भी, तो ऐसा पाखंड करना भी हर किसी के बस की बात नहीं है।”

सुलेखा ने कहा कि जो लोग इसे पाखंड मानते हैं, वे धाम पर जाना छोड़ दें, लेकिन बेवजह विवाद क्यों खड़ा कर रहे हैं?

उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि धर्मेंद्र हुड्डा धाम पर अर्जी लगाने की बात को चैलेंज करते हैं, तो बालाजी महाराज की कृपा से वे दिन को रात और रात को दिन साबित कर सकती हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों के कष्ट धाम में जाने से दूर हो रहे हैं, जिनके बच्चे ठीक हो रहे हैं, वे तो इसे भगवान ही मानेंगे।

धर्मेंद्र हुड्डा के दबंग अंदाज और उनके साथ रहने वाले 600-700 युवाओं के काफिले पर सवाल उठाते हुए सुलेखा ने कहा कि अगर धर्मेंद्र हुड्डा में सच में इतनी पावर है, तो वे सिर्फ गरीबों और छोटे-छोटे डेरों पर अपनी ताकत क्यों दिखा रहे हैं?

सुलेखा ने खुली चुनौती देते हुए कहा, “अगर हुड्डा में हिम्मत है, तो वे बड़े-बड़े आश्रमों जैसे आसाराम बापू और रामपाल महाराज के डेरों को बंद करवाकर दिखाएं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय इन बड़े बाबाओं को बाहर निकाल दिया जाता है क्योंकि उनकी राजनीतिक पावर बहुत ज्यादा है। सुलेखा के अनुसार, गरीबों के छोटे डेरों में लोग अपने दुख-दर्द लेकर जाते हैं और ठीक होते हैं, ऐसे में उन्हें बंद करवाना सरासर गलत है।

Exit mobile version