रोहतक में सोमवार को नॉर्थन जोन रेलवे कर्मचारी सोसायटी का चुनाव रेलवे स्टेशन के पास माल गोदाम में हुआ, लेकिन चुनाव को लेकर उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (यूआरएमयू) और नॉर्थन रेलवे मेंस यूनियन (एनआरएमयू) आमने-सामने हो गईं। एनआरएमयू चुनाव करवाने के पक्ष में थी और यूआरएमयू चुनाव नहीं करवाने के पक्ष में।

विरोध के बाद भी सुबह चुनाव शुरू करवा दिया गया, लेकिन शांति पूर्वक ढंग से संपन्न नहीं हो पाया। एक यूनियन के विरोध के चलते बीच में चुनाव को रोकना पड़ा। वहीं चुनाव अधिकारियों ने मामले को तूल पकड़ता देख पुलिस को भी मौके पर ही बुलाया। जिसके बाद पुलिस बल चुनाव केंद्र के बाहर तैनात रही, ताकि शांति बनी रहे। लेकिन विरोध के चलते चुनाव संपन्न नहीं हो पाया। ऐसे में चुनाव अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

दिल्ली डिवीजन की नॉर्थन जोन रेलवे कर्मचारी सोसायटी के डेलीगेट के पद पर चुनाव किया जाना है। दिल्ली डिवीजन में कुल 30 डेलीगेट चुने जाएंगे। जिनमें से 10 आपसी सहमति से निर्धारित किए जा चुके हैं। वहीं 20 डेलीगेट का चुनाव के माध्यम से निर्धारण होना है। जिनमें से एक रोहतक का 24 नंबर डेलीगेट पद भी शामिल है। यहां पर चुनाव सोमवार को आयोजित किया गया।

यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि चुनाव पर पिछले करीब दो साल से रोक लगी हुई थी। रोक लगने से पहले वर्ष 2020 में चुनाव के लिए उम्मीदवारों के आवेदन मांगे गए और उसी समय वोटर लिस्ट भी तैयार की गई। ऐसे में उसी वोटर लिस्ट व आवेदनों के आधार पर उम्मीदवार चुनाव में शामिल किए गए। आरोप यह भी था कि पुरानी वोटर लिस्ट में कई मरे हुए लोगों का भी नाम है।

यूआरएमयू के शाखा अध्यक्ष बिजेंद्र कौशिक ने आरोप लगाया कि 22 जुलाई को कोर्ट ने चुनाव का निर्णय दिया और बिना बताए 25 को चुनाव करवा दिए। सोमवार सुबह ही चुनाव की सूचना मिली। अधिकारियों के पास कोई भी अनुमति नहीं थी। इसलिए उन्होंने चुनाव रुकवाया, लेकिन अधिकारियों ने पुलिस को बुलाकर जबरन चुनाव शुरू करवाया। बिल्कुल गलत तरीके से चुनाव करवाया जा रहा है। मीडिया प्रभारी अजय ने आरोप लगाया कि एसएस ने दूसरी यूनियन से मिलीभगत करके चुनाव करवाया है। सचिव नरेश राठी ने कहा कि चुनाव बंद करने के लिए अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अधिकारियों ने ली नहीं।

एनआरएमयू के शाखा सचिव एसके सैनी ने कहा कि सोसायटी द्वारा 25 को चुनाव का नोटिस निकाला गया था, जिसके आधार पर चुनाव करवाया गया। इसके बाद प्रचार भी शुरू कर दिया था। कोर्ट केस का फैसला आने के बाद जल्द चुनाव के निर्देश दिए थे। इसलिए जल्दी चुनाव करवाना पड़ा था। पहले ही चुनाव लेट था, ऐसे में यह चुनाव पूर्ण रूप से सही था। दूसरी यूनियन ने सभी कर्मचारियों को वोट भी नहीं डालने दिया। उन्होंने हार के डर से यह विरोध किया है। सुबह ऐसी कोई बात नहीं थी, लेकिन बाद में दूसरी यूनियन खुद के उम्मीदवार को हारता देख चुनाव का विरोध करने लगी।

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