16 दिसंबर को 1971 को भारत-पाक युद्ध की ऐतिहासिक जीत मिली थी। आज विजय दिवस के मौके पर हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हुए शिमला समझौते में 90 हजार युद्ध बंदियों को छोड़ना सबसे बड़ी भूल बताया है।

उन्होंने कहा कि 1971 में युद्ध के मैदान में सैनिकों द्वारा जीती गई जंग राजनेता शिमला एग्रीमेंट में टेबल पर हार गए थे। हमारे पास 90 हजार युद्ध बंदी थे, अगर हम चाहते तो उनको छोड़ने के बदले पीओके ले सकते थे लेकिन हमने कोई बारगेनिंग नहीं की। यह बहुत बड़ी भूल थी, जिसे हम आज तक भुगत रहे हैं। आज भी उस युद्ध के कई सैनिक पाकिस्तान में कैद हैं और वह जंग हमने जीतने के बाद एग्रीमेंट टेबल पर हार दी।

बाला कैंट के बंगाली मोहल्ला निवासी सेवा सिंह ने पाकिस्तान से युद्ध के समय बहादुरी दिखाते हुए 5 बम को नंगे हाथों डिफ्यूज किया था। 93 वर्षीय सेवा सिंह का कहना था कि वे पुणे के किरकी में सेना के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप के बम निरोधक दस्ते का हिस्सा थे। दिसंबर 1971 में भारत-पाकिस्तान का 14 दिनों तक युद्ध चला। पाकिस्तान ने पंजाब के जीरा गांव (अब फिरोजपुर जिले में) पर कई बम गिराए, जिनमें से छह विस्फोट नहीं हुए। उन्हीं में से एक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदाम में अनाज की बोरियों के ढेर पर गिरा। सेवा सिंह इस बात से बिल्कुल बेखबर थे कि बम खराब था या फिर उसमें टाइमर लगा हुआ था। जिम्मा मिलते ही जान की परवाह किए आगे बढ़ते चले गए। एक के बाद एक बम को नंगे हाथों ही डिफ्यूज किया।

93 वर्षीय सेवा सिंह।

इस बहादुरी के बाद भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति वराहगिरी वेंकटगिरि ने 24 दिसंबर 1971 को सेवा सिंह को शौर्य चक्र वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल एसएचएफजे मानेकशॉ ने भी 24 दिसंबर 1971 को शौर्य चक्र के उत्कृष्ट पुरस्कार की प्राप्ति पर लिखित रूप में सूबेदार सेवा सिंह को बधाई दी थी। सेवा सिंह ने 1962 के बर्मा आक्रमण और 1965 के भारत-पाक युद्ध में भी भाग लिया था।

YouTube
YouTube
Set Youtube Channel ID
WhatsApp
error: Content is protected !!