नए साल से रोहतक की 16 कॉलोनी, दो बाजार व तीन निजी कालोनियों में प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो गया है। क्योंकि सरकार ने प्रशासन की तरफ से भेजे गए नए कलेक्टर रेट को मंजूरी दे दी है। सोमवार को नए कलेक्टर रेट के तहत 72 रजिस्ट्री हुई, जिसमें 38 सेल्स डीड हैं।
शहर के अंदर प्रॉपर्टी में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उठा-पठक रही। रोहतक की चौधर आने के बाद हुड्डा सरकार के प्रथम कार्यकाल में सबसे ज्यादा शहर में प्रॉपर्टी के अंदर बढ़ोतरी हुई, लेकिन पिछले पांच से सात साल में प्रॉपर्टी के कारोबार में ठहराव आया हुआ है। एक तरफ कोरोना संक्रमण तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार ने सख्त नियम बनाए हुए हैं।
खासकर अवैध तरीके से काटी गई कॉलोनियों पर शिकंजा कसा हुआ है। इसका सीधा असर तहसील में होने वाली रजिस्ट्री पर पड़ रहा है। पहले जहां हर रोज 100 के करीब रजिस्ट्री होती थी, वहीं अगस्त 2020 के बाद औसतन हर रोज 50 से 60 ही रजिस्ट्री हो रही हैं। ऐसे में तहसील प्रशासन ने दिसंबर माह में सरकार को मंजूरी के लिए 20 प्रतिशत एरिया में ही कलेक्टर रेट बढ़ाने की अनुशंसा की थी। सरकार ने तहसील प्रशासन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
रोहतक के तहसीलदार जिवेंद्र मलिक ने बताया कि सरकार ने नए कलेक्टर रेट लागू कर दिए हैं। तहसील प्रशासन से रेट प्रस्तावित करके भेजे थे, उनको मंजूरी मिल गई है। सोमवार को नए कलेक्टर रेट से ही रजिस्ट्री हुई। हालांकि 80 प्रतिशत शहर में कलेक्टर रेट नहीं बढ़ाए गए हैं। जहां तक मास्क लगाने का सवाल है, सख्ती के साथ नियमों का पालन किया जाएगा। मास्क न लगाने वाले कर्मचारियों से भी जवाब मांगा जाएगा।

