पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) की पीएचडी स्कॉलर ज्योति यादव की करंट लगने से हुई दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली 26 वर्षीय ज्योति ने NET-JRF और CTET जैसी कठिन परीक्षाएं पास कर माइक्रोबायोलॉजी में रिसर्च के जरिए साइंटिस्ट बनने का सपना देखा था, लेकिन यूनिवर्सिटी परिसर में हुई कथित लापरवाही ने उनका यह सपना हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया। इस बीच, प्रशासन ने मृतक छात्रा के भाई को नौकरी देने का फैसला किया है।
मंगलवार सुबह पंजाब यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में हॉस्टल नंबर-8 के पास बारिश के दौरान करंट की चपेट में आने से ज्योति की मौत हो गई। हादसे के बाद विश्वविद्यालय में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और एबीवीपी समेत कई छात्र संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की।
ज्योति हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के ककराला गांव की रहने वाली थीं। उनके पिता रविंद्र खेती करने के साथ एक निजी स्कूल में ड्राइवर की नौकरी करते हैं, जबकि भाई पवन गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत है।
परिवार के मुताबिक, ज्योति बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं। उन्होंने गांव के एसडी स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद गुरुग्राम के गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज से बीएससी और हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से एमएससी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने NET-JRF क्वालिफाई किया और पंजाब यूनिवर्सिटी में पीएचडी में दाखिला लिया। उन्होंने बीएड करने के बाद CTET भी पास किया था।
परिजनों ने बताया कि ज्योति को बचपन से पेड़-पौधों और माइक्रोबायोलॉजी में गहरी रुचि थी। वह पौधों से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती रहती थीं। उनका सपना पीएचडी पूरी कर वैज्ञानिक बनने का था। करीब दो महीने पहले घर आने पर भी वह परिवार से अपनी रिसर्च और भविष्य की योजनाओं को लेकर उत्साह से चर्चा करती थीं
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह तेज बारिश के कारण सड़क पर पानी भर गया था। इसी वजह से ज्योति सड़क छोड़कर फुटपाथ से जा रही थीं। हॉस्टल नंबर-8 के पीछे वाले गेट के पास फुटपाथ पर बिजली की कई मोटी केबलें मौजूद है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से एक केबल कटी हुई थी। जिस वजह से बारिश के कारण फुटपाथ पर करंट फैल गया। इसी दौरान वहां से गुजर रही ज्योति उसकी चपेट में आ गईं।
ज्योति के चाचा जतिंदर ने हादसे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने फोन कर सिर्फ इतना बताया कि ज्योति की करंट लगने से मौत हो गई है।
उन्होंने कहा कि परिवार को यह समझ नहीं आ रहा कि अगर करंट से मौत हुई तो शरीर पर स्पष्ट निशान क्यों नहीं थे। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसलिए प्रशासन को घटना का वीडियो और अन्य सबूत सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि हादसे की जगह से कुछ दूरी पर सुरक्षा गार्ड मौजूद रहते हैं, फिर भी समय पर किसी ने मदद नहीं की।
परिवार के अनुसार, हादसे से ठीक पहले 28 जुलाई को ज्योति अपनी मां से फोन पर बात कर रही थीं। बातचीत के दौरान अचानक उनकी चीख सुनाई दी और उसके बाद फोन पर सन्नाटा छा गया। इसी घटना के कुछ समय बाद परिवार को उनकी मौत की सूचना मिली।
ज्योति की मौत के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। एबीवीपी समेत विभिन्न छात्र संगठनों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
छात्र नेता हिमांगी शर्मा ने कहा कि साउथ कैंपस में बिजली से जुड़ा काम चल रहा था और बारिश के दौरान आवश्यक सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि ज्योति विश्वविद्यालय परिवार का हिस्सा थीं और छात्र सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है। छात्र संगठनों ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उधर, हादसे के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच चल रही है।
