साल 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के बहुचर्चित मामले में पंचकूला स्थित CBI कोर्ट ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में पेश 57 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
यह मामला जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। आरोप था कि दिल्ली बाइपास की ओर से आई भीड़ ने रोहतक में कैप्टन अभिमन्यु की कोठी पर हमला किया। आरोपपत्र के मुताबिक, भीड़ लाठी, तलवार और पेट्रोल बम से लैस थी। कथित तौर पर जबरन घर में घुसकर परिसर में खड़े वाहनों को आग लगाई गई, घर के सामान में लूटपाट की गई और पेट्रोल बम फेंकने से कोठी में भीषण आग लगी, जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा किया गया।
रोहित के बयान से शुरू हुई जांच
पूर्व वित्त मंत्री के भतीजे रोहित के बयान के आधार पर वर्ष 2016 में FIR दर्ज हुई थी। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, बाद में राज्य सरकार ने केस CBI को सौंप दिया। CBI ने विस्तृत जांच के बाद 60 लोगों को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो चुकी, जबकि एक को अदालत ने पीओ (घोषित अपराधी) करार दिया।
चार्जशीट में ये नाम थे शामिल
चार्जशीट में अशोक बल्हारा, राहुल दादू, मनोज दूहन, जगपाल उर्फ जग्गा, धर्मेंद्र हुड्डा सहित अन्य के नाम शामिल थे। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने 57 आरोपियों पर फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट की निगरानी में चला ट्रायल
मामले की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में चली। हाईकोर्ट के निर्देश पर साप्ताहिक सुनवाई हुई और ट्रायल समयसीमा के भीतर पूरा कराने के प्रयास किए गए। ट्रायल के दौरान CrPC की धारा 164 के तहत दर्ज बयानों सहित तत्कालीन रोहतक डीसी डी.के. बेहरा, तत्कालीन एसपी और CBI एसपी के बयान भी रिकॉर्ड पर आए।
वर्षों बाद आया निर्णय
यह मामला लंबे समय तक राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर बहस का केंद्र रहा। अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित अपील पर सबकी नजर बनी हुई है।

