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जलघर की टंकी पर चढ़े तीन किसानों पर केस: मामला फिर गर्माया, आगे की रणनीति तैयार करने के लिए मीटिंग करेंगे किसान

सिरसा के डबवाली में भूमि अधिग्रहण के विरोध में 26 नवंबर को जलघर की टंकी पर चढ़ने वाले तीन किसानों पर प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमे में राकेश फगोड़िया, सतनाम सिंह और सुखबीर सिंह के नामजद हैं।

एसडीओ की शिकायत में कहा गया कि टंकी पर चढ़े व्यक्ति ने प्रशासन के खिलाफ किसानों को उकसाया, आत्महत्या की धमकी दी। मुकदमा दर्ज होने के बाद किसानों ने फिर से बैठक बुलाई है। 9 गांवों के किसान लंबे समय से भारतमाला प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण के उचित मुआवजे समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं।

गुजरात के जामनगर से अमृतसर तक 6 लेन प्रोजेक्ट के लिए डबवाली के नौ गांवों की 700 एकड़ भूमि अधिग्रहीत हुई है। किसानों की मांग है कि NHAI एक समान मुआवजा दें और बाजार भाव का चार गुणा मुआवजा उन्हें मिले। NHAI कलेक्टर रेट का दो गुणा मुआवजा दे रहा है। मांगें मनवाने के लिए राकेश फगोड़िया 2 किसानों के साथ 32 घंटे टंकी पर चढ़ गए। अंत में तीसरे दौर की वार्ता में प्रशासन ने किसानों की 10 सूत्रीय मांगों में 8 मांगों को मान लिया। राकेश का दावा है कि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का लिखित में आश्वासन दिया गया। टंकी का आंदोलन समाप्त किया और अन्य दो मांगों के लिए लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया।

किसानों के घर चले जाने पर एसडीओ की शिकायत पर किसान नेता फगोड़िया व अन्य 2 किसानों पर मुकदमा दर्ज कर दिया। मुकदमा दर्ज करने के बाद गंगानगर के किसान नेता राकेश बिश्नोई, भारतमाला संघर्ष समिति राजस्थान के प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा, किसान मोर्चा बीकेयू के नेता रवि आजाद, भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप के नेता एडवोकेट खुशदीप, चौटाला पेक्स उप प्रधान दयाराम, राकेश फगोड़िया ने संयुक्त रूप से प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा अगर कोई भी अलोकतांत्रिक कार्य हुआ तो राजस्थान, हरियाणा से किसान सिरसा कूच करेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए की तत्काल झूठे मुकदमे वापस लेकर अन्य दो मांगें केंद्र सरकार को भेज कर विचार करें। आमजन के हित में फैसला लेते हुए सर्विस रोड दी जाए, पुरखों की पुश्तैनी भूमि का उचित मुआवजा देकर किसानों को संतुष्ट करें अन्यथा आर-पार का संघर्ष लगातार जारी रहेगा। भारत भूमि बचाओ संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन चढूनी, बीकेयू, अखिल भारतीय किसान सभा, सीआईटी उनसे संबंधित ट्रेड यूनियनों अन्य तमाम संघर्ष के साथी जल्द बैठक करके उग्र आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। अगर दमन हुआ तो इन्हीं 9 गांव में मोर्चा लगाकर सरकार का मुकाबला करेंगे।

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