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गुरुग्राम की महंगी प्रॉपर्टी से दूरी बना रहे खरीदार:अब वृंदावन-गोवा पहली पसंद, दिल्ली NCR में घर खरीदना हुआ मुश्किल

दिल्ली-एनसीआर, विशेषकर गुरुग्राम में आसमान छूती प्रॉपर्टी की कीमतों के बीच अब घर खरीदारों और निवेशकों का रुझान तेजी से बदल रहा है। एमजी रोड स्थित ब्रिस्टल होटल में आयोजित दो दिवसीय ‘एक्जिम प्लस एक्सपो’ (Exim Plus Expo) में पहुंचे देश के दिग्गज प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स, बिल्डरों और प्रमोटरों ने यह साफ कर दिया है कि दिल्ली-एनसीआर का रियल एस्टेट अब आम खरीदारों के बजट से बाहर हो चुका है।

एक्सपो में शामिल हुए रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अब गुरुग्राम की बजाय वृंदावन, देहरादून और गोवा जैसे उभरते हुए टियर-2 और टियर-3 शहरों का रुख कर रहे हैं, जहां कम निवेश में बेहतर और नियमित रिटर्न मिल रहा है।

एक्सपर्ट्स ने ग्रुप डिस्कशन के दौरान आंकड़ों के साथ समझाया कि आखिर क्यों निवेशक अब बड़े महानगरों से दूरी बना रहे हैं, आज के समय में गुरुग्राम जैसे बड़े शहर में यदि कोई निवेशक कम से कम 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी खरीदता है, तो उसे हर महीने महज 20 से 30 हजार रुपये का ही किराया मिल पाता है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति वृंदावन, देहरादून या गोवा जैसी टूरिस्ट लोकेशन पर निवेश करता है, तो वहां पूंजी कम लगानी पड़ती है। इन धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर होमस्टे या हॉलिडे होम्स के जरिए ‘डेली बेसिस’ (प्रतिदिन के आधार पर) पर शानदार इनकम हो रही है, जो एनसीआर के मंथली रेंट से कहीं ज्यादा है।

इस दो दिवसीय एक्सपो में रियल एस्टेट सेक्टर के कई बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड्स शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले प्रॉपर्टी विशेषज्ञ राजीव खोसला ने बताया मैंने अपने करियर में 90 हजार से ज्यादा यूनिट्स डिलीवर करवाई हैं, लेकिन यह पहली बार है जब निवेशकों का रुझान टियर-2 और टियर-3 शहरों की तरफ इतनी तेजी से बढ़ा है। यह साफ संकेत है कि दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी अब आम खरीदारों की पहुंच से दूर हो चुकी है।

बेहतर हाईवे, एक्सप्रेसवे, मेट्रो कनेक्टिविटी और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण अब खरीदारों के पास विकल्पों की कोई कमी नहीं है। निवेश का यह नया पैटर्न दर्शाता है कि आने वाले समय में रियल एस्टेट का असली बूम महानगरों के बजाय देश के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों में देखने को मिलेगा।

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