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करोड़ों के कर्ज में दबे कारोबारी पति-पत्नी गंगा में कूदे: बाइक से 80KM हरिद्वार पहुंचे, मरने से पहले सेल्फी ली, फिर लगा दी छलांग; दिव्यांग बेटे ने मुखाग्नि दी

कर्ज का चक्कर कितना डरावना होता है, वह सहारनपुर की इस दर्दनाक घटना से समझा जा सकता है। सोमवार को यहां एक सर्राफा कारोबारी और उसकी पत्नी ने गंगा में कूदकर सुसाइड कर लिया। दोनों सुसाइड करने के लिए नई बाइक से हरिद्वार पहुंचे और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर गंगा में छलांग लगा दी। सुसाइड करने के लिए दोनों शनिवार रात बाइक से 80 किमी दूर हरिद्वार पहुंचे। गंगनहर के पुल पर एक-दूसरे का हाथ पकड़ा, सेल्फी ली और गंगा में छलांग लगा दी। कारोबारी का शव सोमवार सुबह गंगनहर में उतराया मिला। शाम को घटनास्थल से 30 किमी दूर रुड़की में पत्नी का शव बरामद हुआ।

मरने से पहले कारोबारी ने अपने सभी वॉट्सऐप ग्रुप में सुसाइड नोट भेजा। जिसमें लिखा था- मैं कर्ज के दलदल में इस कदर फंस गया हूं कि बाहर ही नहीं निकला पा रहा। मरने से पहले की फोटो हम सभी को शेयर कर देंगे।शुरुआती पुलिस जांच में कारोबारी पर 10 करोड़ का कर्ज होने की बात सामने आई है। परिजनों ने बेटे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया है।

नगर कोतवाली क्षेत्र में किशनपुरा के रहने वाले सौरभ बब्बर (35) की घर में ही श्री साईं ज्वेलर्स नाम से दुकान है। सौरभ की शादी 15 साल पहले मोना बब्बर से हुई थी। उनकी दो संतान हैं। 12 साल की बेटी श्रद्धा और 10 साल का बेटा संयम है। बेटा दिव्यांग है। 5 साल पहले उनका छोटे भाई से बंटवारा हो गया। बंटवारे के बाद सौरभ अपने माता-पिता से अलग रह रहे थे। छोटा भाई मां-बाप के साथ गोविंदनगर में रहता है।

सौरभ सोने-चांदी के गहने बनाने के अलावा कमेटी चलाने का भी काम करते थे। कमेटी में लोग अपना पैसा जमा करते थे। जिसे वह ब्याज के साथ लौटाते थे। बताया जा रहा है कि सौरभ का व्यापार ठप था। वह करीब 10 करोड़ रुपए के कर्ज में थे। लोग अपना पैसा वापस मांग रहे थे। सौरभ ने यह बात अपनी पत्नी मोना को भी बताई थी।

शनिवार की रात सौरभ ने अपने दोनों बच्चों को शहर में रहने वाले नाना-नानी के पास छोड़ा। उन्हें बताया कि कुछ जरूरी काम है, थोड़ी देर में आकर बच्चों को साथ ले जाऊंगा। इसके बाद सौरभ पत्नी मोना के साथ हरिद्वार चले गए। वहां गंगनहर पुल पर सेल्फी ली और पहले से लिखे सुसाइड नोट को वॉट्सऐप ग्रुपों पर शेयर कर दिया। फिर, नदी में कूदकर जान दे दी।

सुसाइड नोट में क्या लिखा, पढ़िए

मैं सौरभ बब्बर कर्ज के दलदल में इस कदर फंस गया हूं कि बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा। अंत में मैं और मेरी धर्म पत्नी मोना बब्बर अपना जीवन समाप्त कर रहे हैं। प्रॉपर्टी, दुकान और हमारा किशनपुरा वाला मकान मेरे दोनों बच्चों के लिए है। हमारे दोनों बच्चे अपने नाना-नानी के घर रहेंगे। इनका जीवन अब हम पति-पत्नी उनके हवाले करके जा रहे हैं। बच्चे हमारे वहीं रहेंगे, हमें किसी और पर भरोसा नहीं है। हमने लेनदारों को अंधाधुंध ब्याज दिया है। हम अब और नहीं दे पा रहे हैं। हम जहां सुसाइड करेंगे। उस जगह जाकर वहां की फोटो हम वॉट्सऐप पर शेयर कर देंगे।’

बेटे-बहू के सुसाइड की खबर पाकर सौरभ और मोना के परिजन हरिद्वार रवाना हो गए। सौरभ के मां-बाप ने रविवार को सहारनपुर में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सहारनपुर पुलिस के इनपुट में हरिद्वार पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया तो सौरभ और बहू मोना की लाश मिली है।

सौरभ बब्बर का अंतिम संस्कार हुआ। लोग श्मशान भूमि पहुंचे, मगर इनमें ज्यादातर लोग ऐसे थे, जिनके मन में एक ही सवाल था, वो ये कि दंपती ने क्या सिर्फ कर्ज की वजह से सुसाइड किया? ये रकम बढ़ते हुए 10-15 करोड़ कैसे पहुंच गई?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जो कुछ सामने आया, उसके मुताबिक सौरभ का सराफा कारोबार था। साथ ही वह गोल्ड कमेटी भी चलाता था। सहारनपुर के करीब 1 हजार लोगों का सोना और करोड़ों की रकम सौरभ के पास जमा थी। वह 5 कमेटी पूरी भी कर चुके थे। मतलब लोगों के सोने के जेवर और जमा पैसा वापस भी कर चुके थे। मगर फिर धोखा, जिल्लत और कर्ज के दलदल में ऐसे धंसे कि उबर ही न सके।

गोल्ड कमेटी को चलाने में सौरभ का सपोर्ट सहारनपुर का एक बड़ा सराफा कारोबारी कर रहा था। सौरभ ने गोल्ड कमेटी में शामिल करीब 100 लोगों को सोना देने के लिए बड़े सराफा कारोबारी से करीब 6 से 7 करोड़ का सोना बुक किया। यहां एक नई कहानी सामने आई कि सौरभ जिस सराफा के पास लोगों का पैसा डिपॉजिट कर रहा था। उसका बेटा करीब 20 दिन पहले 7 करोड़ रुपए लेकर दुबई चला गया। सराफा कारोबारी ने सौरभ को गोल्ड और उसका डिपॉजिट पैसा वापस करने से फिलहाल मना कर दिया।

इसके बाद सौरभ बेहद दबाव में आ गया। लोग उससे सोना और पैसा मांग रहे थे। मगर वह कुछ भी वापस देने की स्थिति में नहीं था। बातचीत में एक बात और सामने आई कि सौरभ ने ज्यादातर लोगों को 11 अगस्त का समय दिया था। उसने कहा था कि वह सबका सोना और पैसा वापस कर देगा। मगर सौरभ काफी कोशिश के बाद भी कहीं से पैसों का इंतजाम नहीं कर पाया।

वायदे से 2 दिन पहले ही सौरभ पत्नी मोना को साथ लेकर बाइक से हरिद्वार पहुंचा। उससे पहले अपनी 12 साल की बेटी श्रद्धा और 8 साल के दिव्यांग बेटे संयम को नाना-नानी के घर छोड़ दिया। बच्चों को नाना-नानी के घर छोड़ने से पहले उसने और मोना ने बच्चों को बहुत प्यार किया। उनका माथा चूमा। फिर ये कहकर निकल गए वो एक-दो दिन में वापस आ जाएंगे। बेटी को कहा- भाई का ख्याल रखना। वहीं सास-ससुर से कहा- बच्चों को किसी बात की कमी न हो। खूब अच्छे से पढ़ाना। लेकिन ससुराल के लोग ये बात समझ नहीं सके कि वो उनकी आखिरी विदाई थी। अब बेटा संयम अपने मां-पिता को याद करके मायूस है, वह एक पैर से दिव्यांग है। मुखाग्नि देने के लिए उसको श्मशान लाया गया। उस बच्चे को देखकर हर किसी की आंखें नम थीं।सौरभ बब्बर के पिता देशराज बब्बर ने कहा- मेरे बेटे की जो आखिरी इच्छा थी, उसे पूरा करूंगा। हमारा घर ज्यादा दूर नहीं है, जब भी बच्चों को देखना होगा तो चला जाऊंगा।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ के घर के बाहर कई लोग ऐसे मिले, जिन्होंने बताया कि वे सोना लेकर कम ब्याज पर पैसा देते थे। वो सौरभ से हमेशा पैसा लेते रहते थे। अब सोना भी गया और पैसा भी। वहीं कई लोग ये भी कहते हुए दिखे कि कमेटी के जिन लोगों को पेमेंट करना था। वो रोजाना सुबह-शाम उसके दरवाजे के चक्कर काटते थे। कई लोग मिले, जिनकी कमेटी पूरे हुए कई महीने हो गए थे। उन्हें न तो सोना मिला और न ही पेमेंट। जिस कारण वो उन्हें भी ब्याज दे रहा था।लेकिन सभी लोग ये जरूर कहते हुए दिखाई दिए कि इतने लोगों का पैसा कहां गया? क्योंकि जैसे कि लोगों को जानकारी थी कि वो कई सालों से ये काम कर रहा था। सौरभ ने कभी किसी को परेशान नहीं किया। मगर स्थिति तब बिगड़ी जब सहारनपुर के एक बड़े सराफा कारोबारी ने 6 से 7 करोड़ रुपए देने से मना कर दिया।

सौरभ का ऑडियो भी पुलिस के हाथ लगा है, जो सुसाइड से पहले का बताया जा रहा है। ऑडियो में सौरभ की आवाज सुनाई दे रही है, वो कह रहा है- गोलू ये सबको दिखा देना, हम लोग हरिद्वार में है और अब मरने जा रहे हैं। ठीक है…। गोलू सौरभ की दुकान पर काम करने वाला नौकर है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हैI परिजन मासूम बच्चों का चेहरा देखकर अपने आंसू नहीं रोक पा रहेंI इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया हैI 7 साल के बेटे ने पिता सौरभ बब्बर के शव को मुखाग्नि दी I

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