बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में पिछले करीब एक माह से आंदोलन कर रहे छात्रों के 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार को चंडीगढ़ में सीएम मनोहर लाल ने बैठक की। हरियाणा निवास में दोपहर बाद 3:35 बजे शुरू हुई मैराथन बैठक करीब साढ़े 4 घंटे चली। दो दौर की वार्ता के बाद सीएम ने बॉन्ड पॉलिसी में कई अहम बदलाव करने की घोषणा की।
इसमें बॉन्ड एग्रीमेंट की समय सीमा 7 से घटाकर 5 साल कर दी। बॉन्ड की राशि 40 से घटाकर 30 लाख की। इसमें लड़कियों को 10% छूट मिलेगी। साथ ही यह भी फैसला लिया गया है कि सरकार एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद छात्र को एक साल के अंदर नौकरी (अनुबंधित) देगी।
सीएम ने कहा कि बॉन्ड पॉलिसी में यह सभी बदलाव छात्रों की मांगों को ध्यान में रखकर उनके साथ बातचीत के बाद किए गए हैं। वहीं, छात्र पॉलिसी में इन बदलाव से सहमत नहीं हैं। छात्र अपनी मांगों पर अड़े हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से जो घोषणा की गईं हैं, वह उन्हें मंजूर नहीं है। अभी हड़ताल जारी रखी जाएगी। सहयोगियों से बातचीत करके ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
दोपहर बाद 3:35 बजे बैठक शुरू हुई। इसमें सीएम, सीएम के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर भी शामिल हुए। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि एमबीबीएस बॉन्ड मामले में कई अहम बदलाव किए हैं। इसके बाद छात्रों ने अपनी मांगें रखीं। इसमें काफी मुद्दों पर सहमति बन गई।
इसके बाद 6:30 बजे ब्रेक हुआ। इसके बाद जैसे ही स्टूडेंट्स बैठक में पहुंचे तो सिर्फ बॉन्ड एग्रीमेंट की समयसीमा पर ही बात शुरू हुई। स्टूडेंट्स ने कहा कि वे 7 से घटाकर 5 साल करने की बात से सहमत नहीं हैं। इसे 1 साल तक लाया जाए। सीएम बोले, अब संशोधन की गुंजाइश नहीं है।
- बॉन्ड एग्रीमेंट की समयसीमा 7 साल से घटाकर 5 साल की है। इसमें पीजी की पढ़ाई को भी शामिल है। बॉन्ड राशि 40 से घटाकर 30 लाख की है। फीस घटा दें तो यह राशि 25 लाख होगी। लड़कियों को 10% छूट मिलेगी।
- एमबीबीएस कर रहे छात्र के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो परिवार बॉन्ड राशि भरने के लिए बाध्य नहीं होगा।
- एक साल में सरकारी नौकरी (अनुबंधित) मिलेगी। छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद प्राइवेट नौकरी करता है और वेतन मेडिकल ऑफिसर से कम है तो तब तक बॉन्ड राशि नहीं देनी होगी जब तक वेतन मेडिकल ऑफिसर के बराबर या उससे ज्यादा नहीं होता।
छात्रों ने ये मांगें रखीं…
- सरकारी कॉलेज से पास आउट छात्रों के लिए सिर्फ एक साल सरकारी अस्पताल में नौकरी का प्रावधान हो।
- डिग्री पूरा होने के दो माह के अंदर पोस्टिंग दी जाए। वरना विद्यार्थी को बॉन्ड से मुक्त किया जाना चाहिए।
- कोई छात्र इस पोस्टिंग को ज्वाॅइन नहीं करता है तो बॉन्ड उल्लंघन की राशि अधिकतम 10 लाख होनी चाहिए।
- बैंक द्वारा छात्र के नाम पर लोन उस स्थिति में सेंक्शन किया जाना चाहिए, जब वह सरकारी पोस्टिंग को ठुकराता है।
- छात्र को कहीं पीजी सीट एमडी, एमएस में दाखिला मिल जाता है तो उसे पीजी कोर्स पूरा करने के बाद सेवा पूरी करने की अनुमति दी जाए।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्र पंकज ने बताया कि अभी हड़ताल खत्म नहीं हुई है। सरकार की घोषणाओं से हम सहमत नहीं हैं। पूरी बैठक के दौरान जॉब, सर्विस, डॉक्टरों के मांग की बारे में कोई बात नहीं की गई। यह बैठक केवल लोन री-पेमेंट पर ही आधारित रही।

