झज्जर में करीब 50 घंटे की लगातार तलाश के बाद मातनहेल निवासी और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान में कार्यरत लेक्चरर विकास दहिया का शव मंगलवार को जेएलएन नहर के अकेहड़ी मदनपुर पंप के पास बरामद हो गया। एनडीआरएफ की टीम ने सर्च ऑपरेशन के दौरान शव को नहर से बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए झज्जर के नागरिक अस्पताल भिजवा दिया।
लगभग 50 घंटे बाद जेएलएन नहर से लेक्चरर विकास दहिया का शव अकेहड़ी मदनपुर पंप के पास मिला है। एनडीआरएफ टीम ने शव को निकाला। शव को पोस्टमार्टम के लिए झज्जर नागरिक अस्पताल भेजा गया। तीन दिन तक चला सर्च ऑपरेशन आखिरकार हुआ खत्म। 38 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ आईएएस की तैयारी करना चाहते थे IIT से ग्रेजुएट विकास। परिजनों के अनुसार विकास दहिया लेक्चरर की सरकारी नौकरी छोड़कर आईएएस की तैयारी करने की योजना बना रहे थे। इस संबंध में उन्होंने परिवार से भी चर्चा की थी। उनके चाचा सुरेश पाल ने बताया कि विकास का सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर देश व समाज के लिए काम करना था जिसके लिए वह नौकरी छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे थे।
रविवार तड़के विकास की कार जेएलएन नहर किनारे लावारिस हालत में मिली थी। कार के अंदर मोबाइल फोन और चाबी भी रखी हुई थी। इसके बाद परिवार ने अनहोनी की आशंका जताई, जिस पर जिला प्रशासन ने पुलिस, एनडीआरएफ, गोताखोरों और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीमों के साथ बड़े स्तर पर सर्च अभियान शुरू किया था।
तलाशी अभियान को तेज करने के लिए सिंचाई विभाग ने जेएलएन नहर का पानी अन्य नहरों और माइनरों की ओर डायवर्ट कर जलस्तर कम किया। कई स्थानों पर सुरक्षा जाल लगाए गए और गोताखोरों ने लगातार नहर के अलग-अलग हिस्सों में सर्च किया। करीब 50 घंटे बाद अकेहड़ी मदनपुर पंप के पास विकास का शव मिलने के साथ ही सर्च ऑपरेशन समाप्त हुआ।
विकास के लापता होने के बाद से मातनहेल गांव के लोग लगातार नहर किनारे डटे हुए थे। शव मिलने की सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक अस्पताल व गांव में पहुंचने लगे।
परिजनों के अनुसार विकास दहिया ने आईआईटी से पढ़ाई पूरी की थी। उन्हें करीब 30 लाख रुपए सालाना पैकेज वाली निजी नौकरी का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने परिवार, विशेषकर अपनी मां के पास रहने के लिए वह अवसर छोड़ दिया। बाद में उन्होंने सरकारी सेवा को चुना और झज्जर के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान में लेक्चरर के रूप में कार्यभार संभाला।
परिजनों के अनुसार विकास दहिया सरकारी नौकरी छोड़कर आईएएस की तैयारी करने की योजना बना रहे थे। इस संबंध में उन्होंने परिवार से भी चर्चा की थी। उनके चाचा सुरेश पाल ने बताया कि विकास का सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना था और वह इसके लिए नौकरी छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे थे।
भगवान मृतक की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा परिवार को ये असीम दुख सहने की शक्ति दे।
ओम शांति..
